
गुना . प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के हितग्राही बहुत परेशान हैं। पहले उन्हें आवास मंजूरी के लिए नपा कार्यालय के कई चक्कर लगाने पड़े तो अब अगली किस्त प्राप्त करने के लिए वही हाल हैं। हर दिन हितग्राही नपा कार्यालय आते हैं और निराश होकर चले जाते हैं। जिन कर्मचारियों को निर्माणाधीन भवन का फोटो खींचने (जियो टैगिंग) के लिए तैनात किया है, वे न तो कार्यालय में मिलते हैं और यदि मिल भी जाएं तो यह कहकर जाने से मना कर रहे हैं कि पार्षद कहेंगे तब ही वह जाएंगे। इस तरह सैकड़ों हितग्राही समय पर जियो टैगिंग न होने से किस्त से वंचित हो रहे हंै। वहीं अधूरे पड़े भवन का निर्माण आगे नहीं हो पा रहा है। कई गरीब हितग्राही सर्दी के मौसम में झोंपड़ी व किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं। लेकिन उनकी सुनवाई न तो अधिकारी कर रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधि। इस तरह के उदासीन रवैए से हितग्राहियों में शासन-प्रशासन के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कई ऐसे हितग्राही भी हैं जो जल्द किस्त न मिलने की स्थिति में आत्मदाह तक की बात कर रहे हैं।
समय पर जियो टैगिंग न होने की वजह से आगामी किस्त से वंचित हितग्राहियों ने पत्रिका को अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि एक समय अधिकारी और नेता यह कहते थे कि अभी नगर पालिका के चुनाव हो जाने दो। उसके बाद सब काम हो जाएंगे। चुनाव होने के बाद कहने लगे कि अभी परिषद का गठन नहीं हुआ है। जैसे-तैसे पार्षद और नपाध्यक्ष का शपथ ग्रहण हो गया तथा प्रथम सम्मेलन भी हो चुका है। लेकिन व्यवस्था में कोई बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। न तो स्थानीय पार्षद के पास समस्या सुनने समय है और न ही कार्यालय में अधिकारी सही समय पर मिलते हैं। ऐसे में समझ नहीं आ रहा है कि वह अपनी समस्या किसे बताएं।
-
इसलिए आ रही परेशानी
जानकारी के मुताबिक पीएम आवास योजना के तहत बनने वाले घरों का वेरिफिकेशन (जियो टैगिंग) करने की लिए शासन ने टैंडर प्रक्रिया के जरिए एक कंपनी को नियुक्त किया है। इसके ठेकेदार ने जियो टैगिंग के लिए कर्मचारी रखे हैं। इनकी जिम्मेदारी है कि हितग्राही की सूचना पर मौके पर जाकर जियो टैगिंग करें। लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं हो रहा है। यह कर्मचारी किसी के कहने पर ही घर का फोटो लेने जाते हैं। इसी अव्यवस्था के कारण हितग्राहियों को न सिर्फ समय पर किस्त नहीं मिल पा रही है बल्कि कथित रूप से भ्रष्टाचार के हालात पैदा हो रहे हैं। यह बात बीते माह किस्त वितरण मेें सामने भी आ चुकी है। इस मामले की वर्तमान में जांच चल रही है।
-
इसलिए अनिवार्य की गई है जियो टैगिंगसबसे पहले समझें जियो टैगिंग होता क्या है और यह क्यों जरूरी की गई है। जियो टैगिंग का अर्थ है किसी भी स्थान पर किसी भी कार्य पर होने वाली गतिविधि (भौगोलिक स्थिति) या किसी भी स्थान की मौजूदा स्थिति को फोटो, वीडियो द्वारा मैप पर (गूगल मैप) टैग (जियो टैगिंग) करके लाइव (सटीक) जानकारी देना या प्राप्त करना जियो टैगिंग कहलाता है। जब किसी स्थान पर मौजूद जगह की फोटो या वीडियो को गूगल के साथ टैग हो जाती है तो हम उस स्थान की प्रेजेंट समय की स्थिति को घर बैठे पता कर सकते हैं।
-
हितग्राहियों की परेशानी उनकी जुबानी
मेरे हिस्से में जो जमीन आई थी, उसमें मैंने पहली किस्त से मकान बनाना शुरू कर दिया है। अब मुझे दूसरी किस्त मिलनी है। लेकिन फोटो खींचने वाले नहीं आ रहे हंै। बची हुई निर्माण सामग्री रखी है। उसकी देखरेख मैं कब तक करूं। नपा कार्यालय में सीएमओ से मिल चुका हूं लेकिन मेरा कोई काम नहीं हो रहा है। मेरे पड़ोस में जिन लोगों का आवास बन रहा है उन्होंने सेवा कर दी तो उन्हें सही समय पर दूसरी किस्त मिल गई लेकिन मैं गरीब हूं इसलिए अतिरिक्त सेवा नहीं कर पा रहा।
विजय कुमार शर्मा, हितग्राही
-
मैं दोनों पैर से दिव्यांग हूं। वार्ड क्रमांक 7 में मेरा घर बन रहा है। पहली किस्त का काम पूरा हो चुका है। फोटो खींचने वाले नहीं आ रहे हैं। मुझे दो महीना नपा कार्यालय का चक्कर लगाते हुए हो गए हैं। दूसरी मंजिल पर चढ़कर मुझे जाने में बहुत परेशानी होती है। फोटो खींचने वाला कर्मचारी कहता है कि जब तक पार्षद नहीं कहेंगे तब तक मैं नहीं जाऊंगा। वैसे भी तुम्हारे अकेले घर का फोटो खींचने मैं नहीं जाऊंगा।
नानकराम बारेला, हितग्राही
-
इन हितग्राहियों ने भी बताई अपनी पीड़ा
शहर के वार्ड क्रमांक एक में निवासरत कृष्णपाल यादव, प्रकाश परिहार, मर्दन कुशवाह, मोतीबाई कुशवाह, बाबूलाल कुशवाह, जहीर खान ने बताया कि किसी को प्रथम किस्त मिलना है तो किसी को दूसरी और तीसरी। लेकिन उनके प्लाट व मकान का फोटो नहीं खींचा जा रहा है। जिसकी वजह से वह अपने मकान का काम चालू नहीं करवा पा रहे हैंं।
-
यह बोले जिम्मेदार
पीएम आवास के जिन हितग्राहियों को फोटो खिंचवाने में परेशानी आ रही है। वह मेरे पास आएं, समस्या दूर कर दी जाएगी। अभी तक किसी ने हमसे इस संंबंध में शिकायत नहीं की है।
बीबी गुप्ता, इंजीनियर नपा
-
नपाध्यक्ष ने रिसीव नहीं किया फोन
पीएम आवास के हितग्राहियों को जियाे टैगिंग करवाने में आ रही परेशानी को लेकर नपाध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता से उनका पक्ष जानना चाहा लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
Published on:
31 Dec 2022 12:59 am

बड़ी खबरें
View Allगुना
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
