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बारिश में फिर रुकेगी राजधानी की राह, चंदेरी नदी के पुल पर जान का खतरा

अब भी कई पुल-पुलियाएं ऐसे हैं, जिनकी ऊंचाई न बढ़ाने से बारिश में परेशानी का सबब बनेंगे

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गुना

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Satish More

Jun 22, 2018

guna news

बारिश में फिर रुकेगी राजधानी की राह, चंदेरी नदी के पुल पर जान का खतरा

गुना/मधुसूदनगढ़/झागर. बारिश का मौसम नजदीक है, मानसून कभी भी जिले में दस्तक दे सकता है। लेकिन अब भी कई पुल-पुलियाएं ऐसे हैं, जिनकी ऊंचाई न बढ़ाने से बारिश में परेशानी का सबब बनेंगे। इसमें सबसे महत्वपूर्ण टेम नदी का रपटा है, जिसके चढऩे से क्षेत्र का राजधानी से संपर्क टूट जाता है।

होमगार्ड के अनुसार जिले में 9 पुलियाएं बाढ़ प्रभावित हैं। जहां बारिश के दौरान रास्ता बंद होने की संभावना है। इसके अलावा 10 थाना या चौकी क्षेत्रों को भी बाढ़ प्रभावित केटेगिरी में रखा गया है। इनमें चाचौड़ा, जंजाली, म्याना, धरनावदा, फतेहगढ़, आरोन व कुंभराज शामिल हैं। यहां बाढ़ से बचाव की सामग्री के साथ गार्ड तैनात रहेंगे। बाढ़ प्रभावित पुलियाओं में ग्राम बारोद पर सिंध नदी की पुलिया, ग्राम भादौड़ का पुल, ग्राम खामखेड़ा का पुल, कुड़ी मंगवार का रपटा, आरोन से सोवत गांव का रपटा, खेजरा रोड नाला, हाटरोड रपटा, देहरी गांव का रपटा, चौपट नदी का रपटा शामिल है।

हालांकि होमगार्ड का रिकार्ड वर्ष 2013 की रिपोर्ट के आधार पर है और इनमें से कुछ का निर्माण हो चुका है। इन पर पानी आने की ताजा स्थिति इस बार की बारिश के बाद ही मालूम होगी, फिर भी तैयारी नहीं की जा रही है।

रपटा रोकेगा राजधानी की राह
टेम नदी पर उकावद-नसीरपुर का पुल तो बनवा दिया गया है और इस पर आवागमन भी शुरू हो गया है। लेकिन गुंजारी का रपटा अभी भी नीचा है। यहां सडक़ निर्माण के साथ रपटे की ऊंचाई नहीं बढ़ाई गई है। बारिश में यह रपट चढ़ेगा और राजधानी से संपर्क कट जाएगा।

इस रास्ते से हर आधे घंटे में भोपाल के लिए बस सेवा है और प्रतिदिन हजारों लोग भोपाल आते-जाते हैं। इनमें सिरोंज, लटेरी, ब्यावरा आदि जगहों की बसें भी शामिल हैं। रपटे पर पूरी बारिश भर रास्ता रुके रहने की समस्या बनेगी। पूर्व में यहां डंफर बहने के साथ ही दो लोगों की मौत भी हो चुकी है।

पुलिया को साधने रख दी बोरियां
मधुसूदनगढ़ क्षेत्र में चंदेरी नदी की पुलिया भी परेशानी का सबब बनेगी। यह पुलिया पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। इसके नीचे बेस बचा ही नहीं है और पुलिया को साधने के लिए कट्टियां बजरी भरकर पुलिया के नीचे रखा गया है। बारिश में कट्टियों के बहने या कटाव होने से पुल के क्षतिग्रस्त होने की संभावना भी है। यह मार्ग सिरोंज की ओर जाता है और यहां से यात्री बसों की आवाजाही है। हादसा हुआ तो जनहानि भी हो सकती है।

आधा दर्जन रपटे बनेंगे मुसीबत
इसके अलावा मधुसूदनगढ़ से जंजाली मार्ग पर बने करीब आधा दर्जन रपटे भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनेंगे। इस रास्ते पर पडऩे वाले गांवों का रास्ता बंद हो जाएगा। यहां भी बारिश भर सडक़ पर पानी रहने की समस्या है। रोड पर डामरीकरण तो करवा दिया, लेकिन रपटों का निर्माण नहीं करवाया है। रोड पर गोचा आमल्या, खुच्न्या हनुमान मंदिर, काला पाटा सहित अन्य रपटों पर थोड़ी बारिश में ही पानी आ जाता है।

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