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दिग्विजय सिंह के बेटे ने लंच पर बुलाया तो एकता का संदेश देने राघोगढ़ पहुंचे सिंधिया!

दिग्विजय सिंह के बेटे ने लंच पर बुलाया तो एकता का संदेश देने राघोगढ़ पहुंचे सिंधिया!

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गुना

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Deepesh Tiwari

May 16, 2018

scindia

भोपाल/गुना। ज्योतिरादित्य सिंधिया बुधवार को मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह के बुलाने पर राघौगढ़ किले में लंच पर पहुंचे। कांग्रेस के मुताबिक इसमें एकजुटता का संदेश छुपा है कि पूरी कांग्रेस अब एकजुट हो चुकी है।

वहीं जानकार मानते हैं कि पुरानी तल्खियां भुलाकर सिंधिया का यह कदम सचमुच कांग्रेस को एकजुट करता दिखता है। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया का राघौगढ़ लंच पर जाना साबित करता है कि सिंधिया के बारे में कई गलत बातें भी प्रदर्शित करने की कोशिश की जाती रही हैं।

दरअसल ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह की बीच की तल्खियां किसी से छुपी नहीं है। ऐसे में दिग्विजय सिंह जब यूरोप में हैं, तभी जयवर्धन ने सिंधिया को लंच पर आमंत्रित किया है। खास बात यह है कि सिंधिया ने आमंत्रण स्वीकार भी कर लिया है।

नए संबंधों की शुरुआत!...
गौरतलब है कि जयवर्धन सिंह का नाम युवा कांग्रेस के अध्यक्ष के तौर पर भी देखा जा रहा है। ये भी कयास लगाए जा रहे हैं कि जयवर्धन को पार्टी में प्रदेश महासचिव जैसा भी कोई पद मिलने की संभावनाएं हैं। ऐसे में हाईकमान के सामने सिंधिया के समर्थन की जरुरत जयवर्धन सिंह को होगी। हालांकि औपचारिक तौर पर इस लंच को सिर्फ एकता का संदेश कहा जा रहा है।

वहीं, इस मामले को लेकर प्रभात झा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया पर निशाना साधा है। प्रभात झा का कहना है कि छोटे महलपति ने बड़े महलपति को लंच पर बुलाया है। ये अमीरों की पार्टी है अमीरों के किलों और महलों में लंच होते हैं। हैरानी तब होती जब किसी गरीब को खाने पर बुलाया जाता।

झा ने आगे कहा कि पहले सिंधिया को 3 बार सलामी दी जाएगी, फिर लंच होगा। सिंधिया को किसी भी लंच का स्वाद नहीं आता उन्हें सिर्फ वोट दिखते हैं। ये वोट की राजनीति है, कुर्सी बचाने की कोशिश में सिंधिया ने लंच पर जाना स्वीकार किया है।

इधर, ये है भाजपा की नई रणनीति :-
मध्यप्रदेश में चुनावों का समय नजदीक आते ही भाजपा ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा पूर्व में बताई बातों पर अमल करना शुरू कर दिया है। इसी के तहत प्रदेश बीजेपी कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया को रोकने की नई रणनीति पर काम करने में जुट गई है। दरअसल पूर्व में भोपाल आए अमित शाह ने कांग्रेस के बड़े नेताओं को उन्हीं के क्षेत्र में घेरने का फॉमूला भाजपा को दिया था।

इसी के तहत भाजपा अब जल्द इन दोनों को इनके ही गढ़ में घेरने का काम करेगी। माना जा रहा है कि इसके तहत भाजपा दोनों के लिए ऐसे प्लान पर काम करेगी कि दोनों कांग्रेस के बड़े नेता अपना इलाका छोड़कर बाकी प्रदेश में निकल ही नहीं पाएंगे।

दरअसल छिंदवाड़ा को कमलनाथ और गुना को सिंधिया का गढ़ माना जाता है। इन दोनों लोकसभा सीटों पर कांग्रेस खुद को अजेय मानती है। शायद इसी के चलते साल 2014 के लोक सभा चुनावों में मोदी लहर से भी ये दोनों सीटें अछूती रहीं। ऐसे में मध्यप्रदेश में सिर्फ यही दो सीटें थीं, जिन्हें बचा पाने में कांग्रेस कामयाब रही थी।वहीं इसके बाद उपचुनाव में कांतिलाल भूरिया झाबुआ की तीसरी सीट जीतने में सफल हुई थी।

2 सीटों पर अतिरिक्त मेहनत की जरूरत...
पूर्व में 4 मई को जब अमित शाह भोपाल दौरे पर पहुंचे, तो यहां भी पदाधिकारियों को कह गए कि 2 सीटों पर बीजेपी को अतिरिक्त मेहनत करने की जरूरत है। ये दो सीटें हैं, गुना और छिंदवाडा।

ऐसे में जानकारों का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने अपने लाज बचाने के लिए प्रदेश बीजेपी को ये दो सीटें जीतना जरूरी हो गया है। इसी कारण पार्टी इन दोनों सीटों को लेकर गंभीर दिख रही है।

छिंदवाड़ा सीट को जानिये...
छिंदवाड़ा सीट पर करीब 35 सालों से कमलनाथ काबिज हैं। साल 1980 में पहली बार कमलनाथ छिंदवाड़ा सांसद बने, तब लेकर अभी तक कमोबेश ये सीट कमलनाथ के पास ही रही है। 1996 में कमलनाथ ने अपनी पत्नी अल्? नाथ ाथ को इस सीट से उम्मीदवार बनाया था, जिसमें कांग्रेस जीती थी।

1997 में एक साल के लिए ये सीट उपचुनावों में पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा ने कमलनाथ से छीन ली थी, लेकिन बाद में कमलनाथ ने ये सीट फिर से अपने कब्जे में कर ली थी।

गुना-शिवपुरी सीट को जानें...
साल 2002 से ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना सीट पर जीत दर्ज कराते आ रहे हैं। पूर्व में राजमाता सिंधिया और फिर ज्योतिरादित्य के पिता माधवराव सिंधिया इसी सीट से जीतते रहे है। गुना शिवपुरी सीट हमेशा से सिंधिया परिवार के पास रही है। झाबुआ अलीराजपुर सीट फिलहाल कांग्रेस के पास है, नवंबर 2015 में हुए उपचुनावों में कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया यहां से लोकसभा सीट जीते थे।

कांग्रेस आश्वस्त...
इन दोनों सीटों को लेकर कांग्रेस पूरी तरह से आश्वस्त है कि छिंदवाड़ा से कमलनाथ और गुना से सिंधिया को हराना नामुमकिन है। कांग्रेस मीडिया सेल की मानें तो बीजेपी के हाथ से प्रदेश छूटता जा रहा है। बीजेपी कितनी भी कोशिश करे जीत नहीं पाएगी।