9 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

शादी से पहले कपल जरूर करा लें ये 1 टेस्ट, नहीं तो बच्चे को हो सकता है बड़ा खतरा !

Thalassemia: इस बीमारी से होने वाले बच्चे को बचाने के लिए लोगों को शादी के पहले थैलेसीमिया टेस्ट करवाने की आवश्यकता है।

2 min read
Google source verification

गुना

image

Astha Awasthi

May 09, 2024

Thalassemia

Thalassemia: खून में हीमोग्लोबिन होना कितना जरूरी है, यह सब जानते हैं। लेकिन यदि किसी शरीर में हीमोग्लोबिन बनना ही बंद हो जाए तो क्या होगा? जी हां, कई बच्चों के शरीर में हीमोग्लोबिन बनना बंद हो रहा है। थैलेसीमिया जैसी खतरनाक बीमारी की चपेट में आ रहे बच्चों के शरीर में इसी कारण से बार-बार खून बदलना पड़ता है। माता-पिता से बच्चों में होने वाली इस बीमारी को शादी से पहले युवक-युवतियों की जांच कराकर रोका जा सकता है। लेकिन इस बारे में रुचि और जागरुकता का अभाव है।

सामान्य से बहुत कम होता है हीमोग्लोबिन

प्रदेश में थैलेसीमिया बीमारी से पीड़ित मरीज हर वर्ष बढ़ते जा रहे हैं। अनुवांशिक कारणों से होने वाली इस बीमारी से बचाव के लिए प्रशासन की ओर से लोगों को जागरूक करने का दावा किया जाता है लेकिन इसके बाद भी इस बीमारी के मरीजों की संया कम नहीं हो रही है। प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में इस बीमारी की जांच की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन वहां समय रहते पहुंचने वालों की संया काफी कम है। इसके विपरीत जब मर्ज का पता चलता है कि तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। थैलेसीमिया संक्रमित बच्चों को बार-बार खून चढ़ाने के लिए अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं।

थैलेसीमिया संक्रमित व्यक्ति के शरीर में सामान्य से बहुत ही कम मात्रा में हीमोग्लोबिन मौजूद होता है। गमेजर थैलेसीमिया में खून बनना बंद हो जाता है. जिसकी वजह से पीड़ित के अंदर कुछ ही दिनों के अंतराल में दूसरे का खून डाला जाता है। इस बीमारी में आयरन की गोलियों का भी सेवन किया जाता है, ताकि खून बढ़ता रहे। बार-बार खून चढ़ाने के लिए अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित व्यक्ति के ग्रुप के खून की उपलब्धता की भी कोई गारंटी नहीं रहती।

सरकारी अस्पतालों में होती है निशुल्क जांच

थैलेसीमिया मेजर के इलाज के लिए रेगुलर आयरन की गोली लेनी पड़ती है। साथ ही चिलेशन थेरेपी करनी होती है। इसका स्थाई इलाज बोनमैरो ट्रांसप्लांट होता है, यह ज्यादा मुश्किल और महंगा होता है। थैलेसीमिया माइनर की जांच के लिए प्रदेश के सभी जिला अस्पताल में नि:शुल्क सुविधा है। थैलेसीमिया मेजर के बच्चों के लिए सरकार ने डे केयर सेंटर भी बनवाया है, जहां पर उन्हें नि:शुल्क खून उपलब्ध करवाया जाता है। सरकार थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए पेंशन भी उपलब्ध करवाती है।

माता-पिता दोनों को माइनर रोग है तो बच्चे को खतरा ज्यादा

डॉक्टरों के अनुसार थैलेसीमिया वंशानुगत बीमारी है जो माता-पिता से बच्चों में हो सकती है। यदि माता-पिता दोनों माइनर थैलेसीमिया के मरीज हैं तो उनके बच्चों को यह बीमारी होने की ज्यादा संभावना रहती है। इसीलिए इस बीमारी से होने वाले बच्चे को बचाने के लिए लोगों को शादी के पहले थैलेसीमिया टेस्ट करवाने की आवश्यकता है। अगर टेस्ट में दोनों को थैलेसीमिया माइनर आए तो उन्हें आपस में शादी नहीं करना चाहिए। यह तभी पता चल सकता है जब शादी के पहले ही युवक और युवती थैलेसीमिया की जांच करवा लें।

इन सावधानियों से रोकी जा सकती है यह बीमारी

डॉ. भास्कर गुप्ता कहते हैं कि थैलेसीमिया बच्चों को माता-पिता से अनुवांशिक तौर पर मिलने वाला ब्लड डिसऑर्डर है। इस रोग के प्रति जागरुकता के अभाव के कारण बच्चों अधिक ग्रसित हो रहे हैं। जिन परिवारों में थैलेसीमिया का कोई मामला है या इस तरह की बीमारी का संदेह है तो विवाह पूर्व माता-पिता दोनों की रक्त जांच करना चाहिए। गर्भधारण के पूर्व भी विशेषज्ञों की सलाह लेना चाहिए।