पत्रिका स्पॉट लाइट : चार सालों में हर क्षेत्र में आया बदलाव, सीवर की समस्या आज भी जस की तस वाहन पार्किंग में अभी भी सुधार की जरूरत लेकिन अव्यवस्थाओं को दुरुस्त करने जिम्मेदार गंभीर नहीं आपसी विवाद में उलझे अधिकारी कर्मचारी
गुना . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए स्वच्छता मिशन के तहत कायाकल्प अभियान स्वास्थ्य संस्थाओं को सुधारने में कारगर साबित हो रहा है। इसकी वजह से ही गुना जिला अस्पताल में पिछले 4 सालों में काफी ज्यादा सुधार कार्य हुए हैं। इसी वजह से पिछले तीन सालों से जिला अस्पताल सांत्वना अवार्ड भी जीत रहा है। लेकिन अभी भी प्रदेश के टॉप-3 में आने के लिए प्रबंधन को हर स्तर पर बहुत ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है। लेकिन वर्तमान हालातों को देखकर यह चुनौती और ज्यादा मुश्किल नजर आ रही है। क्योंकि इस बड़े काम को अंजाम देने के लिए जिला अस्पताल के पास न तो ऊर्जावान टीम है और न ही सहयोग के लिए पर्याप्त स्टाफ। जो अधिकारी-कर्मचारी हैं वे आपसी मतभेद के चलते एक दूसरे से विवाद में उलझे हुए हैं। वहीं जिम्मेदारों को अपने मूल काम के अलावा दूसरे काम में मदद करने फुर्सत ही नहीं है।
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कायाकल्प टीम इन 8 बिन्दुओं पर करती है निरीक्षण
अस्पताल उन्नयन, सफाई, स्वच्छता, जैविक कचरा प्रबंधन, संक्रमण नियंत्रण, किचिन और मरीजों को भोजन व्यवस्था के साथ अन्य बिंदुओं पर कायाकल्प टीम निरीक्षण करती है। इस तरह जिला अस्पताल को इन आठ मानकों पर खरा उतरना होगा।
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इन क्षेत्रों में आया बदलाव
सफाई : कायाकल्प अभियान के तहत किए जाने वाले मूल्यांकन में सबसे पहला प्वाइंट स्वच्छता है। इस मामले में बीते चार सालों में काफी ज्यादा परिवर्तन देखने को मिला है। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या पहले से ज्यादा होने के बावजूद सफाई के स्तर को बनाए रखना प्रबंधन के समक्ष बड़ी चुनौती है। लेकिन इसे बनाए रखने के लिए प्रबंधन ने जो तरीका अपनाया है वह कारगर साबित हुआ है। जिसके तहत अब कुछ अंतराल के बाद सफाई कार्य किया जाता है। जिसकी मॉनीटरिंग भी की जाने लगी है।
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लाइटिंग : तीन साल पहले तक जिला अस्पताल के मेन गेट से लेकर परिसर और वार्डों में काफी कम रोशनी रहती थी। जिसे कायाकल्प की निरीक्षण टीम ने नोटिस किया था। जिसे प्रबंधन ने सुधारते हुए नई लाइटिंग व्यवस्था की। जिसके तहत पुराने बल्बों को बदलकर एलइडी बल्ब लगाए गए हैं, जिससे बिजली की बचत भी हो और रोशन भी ज्यादा।
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ये समस्याएं जस की तस
सीवर : यह समस्या जिला अस्पताल की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। जिसे अब तक पूरी तरह से दूर नहीं किया जा सका है। कई वार्डों में सीवर लाइन चौक होने की वजह से शौचालयों का उपयोग तक बंद करना पड़ा है। वहीं परिसर में जगह-जगह सीवर चैंबर खुले पड़े हैं। जो कई ओवर फ्लो होकर खुले में बहते नजर आते हैं। हाल ही में कलेक्टर ने भी निरीक्षण के दौरान यह कमी देखी थी।
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पार्किंग : इस व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए प्रबंधन ने वाहन स्टैंड को ठेका दिया है। लेकिन इसके बाद भी वाहन व्यवस्थित रखे नहीं हो रहे हैं। मरीज अटैंडर जहां चाहें वहां अपना वाहन पार्क कर चले जाते हैं, जिससे अन्य मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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जानवर : इस समस्या को अब तक प्रबंधन खत्म नहीं कर पाया है। जबकि जानवरों को रोकने मेन गेट पर नया केटिल गार्ड भी लगवा दिया गया है। जानवर परिसर के अंदर खुलेआम पूरे समय विचरण करते नजर आते हैं। कई बार मरीज अटैंडरों के भोजन पर ही हमला कर देते हैं। इनकी वजह से परिसर में गंदगी भी फैल रही है।
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यह बोले जिम्मेदार
कायाकल्प अभियान के तहत बीते तीन सालों से हम लगातार बेहतर कर रहे हैं। अस्पताल के प्रत्येक क्षेत्र में काफी कुछ नया हुआ है। इसी वजह से हमें सांत्वना अवार्ड मिला है। जो भी कमियां हैं उन्हें हम दूर करने में जुटे हुए हैं। कुछ समस्याओं को दूर करने में बजट आड़े आ रहे है फिर भी हम अपनी तरफ से बेस्ट देने का प्रयास कर रहे हैं। पब्लिक प्लेस होने की वजह से व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखना थोड़ा मुश्किल रहता है।
डॉ शिल्पा टाटिया, उपप्रबंधक
जिला अस्पताल गुना