
सरकार ने भले ही मोबाइल टावर लगाने के लिए नियम कानून बना दिए हैं लेकिन इसका पालन कराने के प्रति प्रशासन कतई गंभीर नहीं है।
गुना. सरकार ने भले ही मोबाइल टावर लगाने के लिए नियम कानून बना दिए हैं लेकिन इसका पालन कराने के प्रति प्रशासन कतई गंभीर नहीं है। नतीजतन शहर की हर गली मोहल्ले से लेकर घनी बस्तियों में बहुमंजिला इमारतों से लेकर स्कूल की छतों पर भी मोबाइल टावर लग चुके हैं। यही नहीं आसपास रहने वाली जनता कई बार इन मोबाइल टावरों को लेकर विरोध जताने से लेकर लिखित शिकायत कर चुकी है लेकिन आज तक कोई परिणाम नहीं निकला है।
अधिकारियों के रवैए से आम जनता में आक्रोश है। टावर लगाने निर्धारित गाइड लाइन की सबसे पहली शर्त है कि किसी भी घनी बस्ती में नहीं लगाया जा सकता। लेकिन इस नियम को दरकिनार कर शहर की श्रीराम कालोनी, सिसोदिया, दुर्गा, कर्नलगंज, लूशन का बगीचा, कैंट क्षेत्र, गुलाबगंज, नानाखेड़ी, राधा कालोनी, मुख्य बाजार, रसीद कॉलोनी सहित कई घनी बस्तियों में नियम विरुद्ध टावर लगे हुए हैं। जबकि इन इलाकों में कई स्कूल भी मौजूद हैं। हाल ही में आदर्श कॉलोनी में एक मोबाइल कंपनी बगैर अनुमति के टॉवर लगा रही है, इसका विरोध वहां के लोग कर रहे हैं लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं हैं।
आबादी वाले इलाके से 35 मीटर दूर हो टावर: मोबाइल टावर लगाने के लिए जमीन से पांच मीटर की ऊंचाईं तक बेस का निर्माण करना जरूरी है। आबादी वाले इलाके से टावर की दूरी कम से कम 35 मीटर अनिवार्य है। एंटीना की संख्या के आधार पर दूरी का निर्धारण किया गया है।
प्रदूषण विभाग से एनओसी जरूरी: संबंधित मोबाइल कंपनियों को अब नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) केवल नपा से नहीं नहीं बल्कि प्रदूषण विभाग से भी लेना जरूरी है। मकान पर टावर लगवाने भवन का नक्शा पारित होना जरूरी है। रेडिएशन की जांच के लिए राज्य स्तरीय टर्मसेल यूनिट रांची से एनओसी लेना होगा।
किस एरिया में कितना हो रहा है नुकसान
एक्सपर्ट की मानें तो मोबाइल टावर के 300 मीटर एरिया में सबसे ज्यादा रेडिएशन होता है। एंटीना के सामने वाले हिस्से में सबसे ज्यादा तरंगें निकलती हैं। मोबाइल टावर से होने वाले नुकसान में सबसे महत्वपूर्ण बात है कि घर, टावर पर लगे एंटीना के सामने है या पीछे। टावर के एक मीटर के एरिया में 100 गुना ज्यादा रेडिएशन होता है। टावर पर जितने ज्यादा एंटीना लगे होंगे, रेडिएशन उतना ज्यादा होगा।
इन बीमारियों का जनक है रेडिएशन: थकान, अनिद्रा, डिप्रेशन, ध्यान भंग, चिड़चिड़ापन, चक्कर आना, याद्दाश्त कमजोर होना, सिरदर्द, दिल की धड़कन बढ़ता, पाचन क्रिया पर असर, कैंसर का खतरा बढऩा, ब्रेन ट्यूमर आदि।
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स हैं खतरनाक
मोबाइल टावर से निकलने वाली इलेक्ट्रो मैग्नेटिक वेव्स कैंसर का कारण बनती हैं। रेडिएशन से इंसान ही नहीं जानवरों पर भी असर पड़ता है। यही वजह है कि जिस एरिया में मोबाइल टावरों की संख्या अधिक होती है, वहां पक्षियों की संख्या कम हो जाती है। गांवों में मधुमक्खियोंं की संख्या कम हो गई हैं।
Published on:
04 Aug 2019 10:00 pm
बड़ी खबरें
View Allगुना
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
