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हरियाणा में उद्योगपतियों के लिए सपना बनी सिंगल विंडो

नए उद्योग की स्थापना को पुराने नियम हो रहे लागू, बंसीलाल, चौटला व हुड्डा की सरकारों ने दिखाए केवल सपने

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Yuvraj Singh Jadon

Aug 21, 2015

officers, ministers and legislators of haryana

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चंडीगढ़। एक तरफ हरियाणा के मुख्यमंत्री विदेशों में दौरा करके उद्योगपतियों को पूंजी निवेश के लिए उत्साहित कर रहे हैं तो दूसरी तरफ हरियाणा में नए उद्योगों की स्थापना आज भी पुराने नियमों के तहत हो रही है। प्रदेश में उद्योगपतियों के सिंगल विंडो प्रणाली एक सपना बनकर रह गई है। प्रदेश की पूर्व तथा मौजूदा सरकार ने अभी तक इस मामले में उद्योगपतियों के साथ केवल वादे ही किए हैं।

हरियाणा में उद्योगों की स्थापना के लिए उद्योगपतियों द्वारा लंबे समय से सिंगल विंडो सिस्टम की मांग की जा रही है। प्रदेश में एक उद्योग की स्थापना के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग, उद्योग विभाग, बिजली निगम, जलापूर्ति विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन विभाग समेत करीब एक दर्जन विभागों से अनापत्ति प्रमाण की जरूरत होती है।

भाजपा सरकार का दावा था कि हरियाणा में उद्योगों की स्थापना के लिए सीएलयू की प्रक्रिया को गुजरात की तर्ज पर लागू किया जाएगा। इस दिशा में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। राज्य की पूर्व हुड्डा सरकार के कार्यकाल में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेेने की प्रक्रिया ऑन लाइन शुरू हो चुकी थी। इसके नियम व शर्तें नरम करने की दिशा में सरकार ने कोई काम नहीं किया। इसके अलावा नए उद्योग की स्थापना में अहम भूमिका निभाने वाले उद्योग विभाग, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग, जलापूर्ति विभाग तथा वन विभाग आदि में आज भी कामकाज पुराने नियमों के अंतर्गत ही हो रहा है। इन विभागों की कार्यप्रणाली में किसी तरह का बदलाव नहीं आया है।

हरियाणा की पूर्व स्वर्गीय बंसीलाल के नेतृत्व वाली सरकार हो या फिर चौटाला व हुड्डा समेत सभी सरकारों ने उद्योगपतियों को सिंगल विंडो के नाम पर केवल सपने ही दिखाए हैं। सत्तारूढ़ भाजपा ने अन्य राजनीतिक दलों से एक कदम आगे बढ़ाते हुए हरियाणा में उद्योगों की स्थापना के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने घोषणा की थी। हालही में सरकार द्वारा घोषित की गई औद्योगिक नीति में भी इसकी घोषणा की गई है। इसके बावजूद धरातल पर अभी कोई काम नहीं हुआ है और मुख्यमंत्री विदेश दौरा करके प्रवासी भारतीयों को निवेश के लिए आकर्षित कर रहे हैं। इसके उल्ट हरियाणा की स्थिति कुछ और है।

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