
छोटी उम्र के बच्चे बना रहे बड़े रिकॉर्ड, इनकी प्रतिभा के आप भी हो जाएंगे कायल
(इंफाल): मणिपुर बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने 12 वर्षीय आइजक पी वाईपेई को हाईस्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (मैट्रिक) की परीक्षा के लिए आवेदन करने की अनुमति दे दी है। इस तरह आइजक राज्य में मैट्रिक की परीक्षा देने वाला सबसे कम उम्र का छात्र होगा।
आइजक मणिपुर के चुड़ाचांदपुर जिले के कंगवाई गांव का रहने वाला है। बोर्ड के नियमानुसार 15 साल की उम्र पूरी करने के बाद ही छात्र मार्च या अप्रैल में आयोजित होने वाली मैट्रिक की वार्षिक परीक्षा दे सकता है। बोर्ड ने इसे एक विशेष मामला बताया है।
आइजक के पिता ने पिछले साल बोर्ड को एक आवेदन देते हुए नियम से कम उम्र में परीक्षा देने की अनुमति अपने बेटे के लिए मांगी थी। इसके बाद इंफाल के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के मनोवैज्ञानिक विभाग में आइजक का टेस्ट करवाया गया। आइजक के लिए मशहूक वैज्ञानिक सर आइजक न्यूटन आर्दश हैं। आइजक अब बेहद खुश है कि उसे कम उम्र में ही मैट्रिक की परीक्षा देने का मौका मिला है।
12 साल का बच्चा बना साइंटिस्ट...
भारतीय बच्चों की प्रतिभा को दर्शाने वाला ऐसा ही एक मामला बीते दिनों हैदराबाद से सामने आया था। हैदराबाद के रहने वाले 12 वर्षीय सिद्धार्थ श्रीवास्तव पिल्लै ने एक सॉफ्टवेयर कंपनी ने बतौर डेटा साइंटिस्ट नियुक्ति दी है। सिद्धार्थ 7वीं कक्षा के छ़ात्र है। डेटा साइंटिस्ट बनने के लिए मैथ्स, कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल करनी होती है। वहीं पायथन, जावा, सैस जैसी प्रोग्रामिंग भाषाओं का ज्ञान भी जरूरी होता है। सिद्धार्थ ने अपने पिता से कोडिंग सिखकने के बाद अपनी काबिलियत सिद्ध करते हुए यह मुकाम हासिल किया।
Published on:
2 Dec 2019, 9:51 PM IST
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