20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नागोरीक सुरक्षा मंच ने छेड़ा त्रिपुरा में मूल निवासी का राग

एनएसएम नेता दीपतेन्दु नाथ ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि...

less than 1 minute read
Google source verification
नागोरीक सुरक्षा मंच ने छेड़ा त्रिपुरा में मूल निवासी का राग

नागोरीक सुरक्षा मंच ने छेड़ा त्रिपुरा में मूल निवासी का राग

(अगरतला,सुवालाल जांगु): पूरे देश में जहां सीएए और एनआरसी को लेकर बहस छिड़ी हुई है वहीं त्रिपुरा में राज्य के मूलनिवासी के मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है। बहुसंख्यक बंगाली समुदाय से जुड़े उत्तरी त्रिपुरा के एक सामाजिक सक्रियतावादी समूह नागोरीक सुरक्षा मंच(एनएसएम) का दावा है कि वह यहां के मूलनिवासी है जबकि आदिवासी बाहर से आए है।


एनएसएम नेता दीपतेन्दु नाथ ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि बंगाली समुदाय के लोग चकला रोशनाबाद राजस्व क्षेत्र (अब बांग्लादेश) के निवासी रहे हैं जो कि त्रिपुरा के राजाओं के अधीन था। इसलिए बंगाली विदेशी नही हैं बल्कि त्रिपुरा के मूल निवासी हैं। उनका कहना है कि त्रिपुरा राजशाही के समय बंगाली सरकारी भाषा थी। क्योंकि बंगाली यहां के मूलनिवासी थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि बंगाली समुदाय के पास कई सारे दस्तावेज और रेकॉड्र्स हैं जिनसे यह साबित होता हैं त्रिपुरा में आदिवासियों के आने से पहले बंगाली यहां रह रहे थे।

नाथ ने आगे बताया कि त्रिपुरा में मूल निवासी का मुद्दा तब शुरू हुआ जब मिज़ोरम से ब्रू आदिवासी राज्य में प्रवासी के तौर पर आने लगे। उन्होंने यह भी कहा कि मिज़ोरम के ब्रू आदिवासियों को राज्य में बसाने की बजाए उन्हें वापिस मिज़ोरम भेजना चाहिए। नाथ ने आरोप लगाया ब्रू प्रवासियों को बसाने के लिए 6,000 लोगों को अपने घरों से हटाया जाएगा। नाथ ने दोहराया कि हम चाहते हैं कि आदिवासियों को उनकी सही जगह जाना चाहिए।