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फूल तोडऩे की मिली ऐसी सजा कि तौबा कर बैठे…

यहां फूल तोडऩा मना है। इस मनाही की अनदेखी करना तीन व्यापारियों को महंगा पड़ गया। फूलों को तोडऩे की उनकों अच्छी-खासी कीमत चुकानी पड़ गई।

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फूल तोडऩे की मिली ऐसी सजा कि तौबा कर बैठे...

फूल तोडऩे की मिली ऐसी सजा कि तौबा कर बैठे...

गुवाहाटी (राजीब कुमार): यहां फूल तोडऩा मना है। फूलों को तोडऩे की इस मनाही की अनदेखी करना कई बार महंगा सौदा भी साबित हो सकता है। ऐसे ही मामले की अनदेखी करना तीन व्यापारियों को महंगा पड़ गया। फूलों को तोडऩे की उनकों अच्छी-खासी कीमत चुकानी पड़ गई। व्यापारियों ने भविष्य में ऐसी पुनरावृति करने से कान पकड़ लिए। हुआं यूं कि असम में दुर्गा पूजा में कमल के फूल की कली की काफी मांग रहती है।

लालच से डोला ईमान
राज्य के विभिन्न तालाबों में ढेरों कमल के फूल खिलते हैं। इससे इलाकों की खूबसूरती देखते ही बनती है। देवी दुर्गा की प्रतिमा के आगे कमल के फूल की कली अर्पित की सभी की इच्छा रहती है। मांग और आपूर्ति में अतंर होने से कमल की कलियों की कीमत भी खूब मिलती है। कीमत के इसी लालच के जाल में व्यापारी भी फस गए।

कापला तालाब में बड़ी संख्या में हैं कमल
असम के बरपेटा जिले के सथेबज़ड़ी ऐतिहासिक कापला तालाब कमल के फूलों के लिए प्रसिद्ध हैं। इस तालाब में कमल के फूलों का मनोहारी दृश्य देखा जा सकता है। प्रकृति के इस वरदान को क्षेत्र के लोग सहेजे हुए हैं। हजारों की संख्या में कमल होने के बावजूद कभी भी इनका व्यापारिक उपयोग नहीं किया गया। सिर्फ धार्मिक उत्सवों पर जरूरत के मुताबिक ही इनका अर्पण किया जाता रहा है। इतनी बड़ी संख्या में कमल की मौजूदगी और बाजार में इनकी बढ़ती मांग से तीन दुकानदारों की नीयत में खोट आ गया। दुकानदारों ने चोरी-छिपे तरीके से बड़ी संख्या में फूल तोड़ कर बाजार में बेचने का सिलसिला शुरू कर दिया। बोरों में भरकर ये तीनों कमल के फूल और कलियां ले जाते और गुवाहाटी के बाजार में बेच देते।

जुर्माने की देनी पड़ी सजा
तालाब में कमल के फूलों की संख्या में कमी होते देख कर क्षेत्र के लोगों को कुछ गड़बड़ी होने का एहसास हुआ। तालाब के आस-पास चौकसी करने के दौरान पता चला कि दुकानदार बड़ी तादाद में कमल के फूलों को तोडऩे मे लगे हुए हैं। लोगों ने सथेबजड़ी एरा गांव के रबेन दास, नरेन दास और बिश्वेशर दास को रंगे हाथों कलियां तुड़वा कर ले जाते हुए पकड़ लिया। इन तीनों पर फूल तोडऩे के अपराध में १५ हजार रूपए का जुर्माना लगाया गया। तीनों दुकानदारों ने भविष्य कभी ऐसी नहीं गलत करने का आश्वासन भी दिया। इसके बाद मामला पुलिस को देने के बजाए इन्हें छोड़ दिया गया।