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शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ सख्त हुई असम सरकार, इस साल हादसे में हो चुकी है 2,606 मौतें

असम के परिवहन मंत्री परिमल शुक्लाबैद्य ने कहा दूध स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, शराब नहीं। शराब पीकर गाड़ी चलाना और भी बुरा है। इससे दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए, शराब पीने के बाद कार चलाना या दोपहिया वाहन चलाना अच्छा नहीं है। उन्होंने शराब पीकर गाड़ी चलाने के खिलाफ अभियान चलाते हुए साहसिक कदम उठाने का फैसला किया।

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शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ सख्त हुई असम सरकार, इस साल हादसे में हो चुकी है 2,606 मौतें

शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ सख्त हुई असम सरकार, इस साल हादसे में हो चुकी है 2,606 मौतें


असम के परिवहन मंत्री परिमल शुक्लाबैद्य ने कहा दूध स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, शराब नहीं। शराब पीकर गाड़ी चलाना और भी बुरा है। इससे दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए, शराब पीने के बाद कार चलाना या दोपहिया वाहन चलाना अच्छा नहीं है। उन्होंने शराब पीकर गाड़ी चलाने के खिलाफ अभियान चलाते हुए साहसिक कदम उठाने का फैसला किया। उन्होंने कहा "मुझे परवाह नहीं है अगर मैं मंत्रालय खो देता हूं, लेकिन मैं कहूंगा कि शराब पीना हानिकारक है," शुक्लाबैद्य, राज्य के उत्पाद शुल्क मंत्री भी हैं। वे एक सडक़ अभियान के दौरान बोल रहे थे।
आखऱिकार, शराब की बिक्री राज्य के राजस्व का एक प्रमुख स्रोत है। हाल ही में तीन दिवसीय दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान अकेले गुवाहाटी में 22.05 करोड़ रुपये की शराब बेची गई थी। इसने 2022 में इसी अवधि के दौरान राज्य के खजाने में 17 करोड़ रुपये कमाए।
उन्होंने हाल ही में सडक़ सुरक्षा के बारे में लोगों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए रॉयल एनफील्ड की सवारी की, क्योंकि राज्य में दुर्घटनाओं की घटनाएं चिंताजनक अनुपात में हैं। एक महीने की यात्रा के दौरान वह सभी 126 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेंगे।
असम में इस साल जनवरी से अक्टूबर के बीच 6,001 दुर्घटनाएं और 2,606 मौतें दर्ज की गईं। कुल मिलाकर 4,800 अन्य घायल भी हुए।
इसी तरह, वर्ष 2022 में 7,023 दुर्घटनाएँ दर्ज की गईं, जिनमें 2,994 लोग मारे गए और 5,637 अन्य घायल हुए। फिर, 2021 में 7,404 दुर्घटनाएँ हुईं। कुल मिलाकर 3,030 लोग मारे गए और 5,759 अन्य घायल हुए।
शुक्लाबैद्य ने सडक़ यातायात पीडि़तों के लिए विश्व स्मरण दिवस पर "पथ सुरक्षा जन आंदोलन" शुरू किया। उन्होंने इस अखबार को बताया कि सरकार इस अभियान को जन आंदोलन के स्तर पर ले जाना चाहती है।
"सडक़ दुर्घटनाओं के पीछे का कारण बिना हेलमेट पहने गाड़ी चलाना, तेज गति से गाड़ी चलाना, लापरवाही से गाड़ी चलाना और शराब पीकर गाड़ी चलाना है। वाहन चलाते समय मोबाइल फोन पर बात करने से भी दुर्घटनाएं होती हैं। हमने सोचा कि अगर हम बड़े पैमाने पर जागरूकता पैदा कर सकें, तो दुर्घटना दर कम हो जाएगी।'' उन्होंने कहा, ''मैं हर दिन अलग-अलग वर्ग के लोगों से मिल रहा हूं। वे अगले चरण में आंदोलन जारी रख सकते हैं।'' लोकसभा चुनाव अभी कुछ महीने दूर हैं लेकिन उन्होंने कहा कि सडक़ पर प्रचार में कोई राजनीति नहीं है। उन्होंने कहा, ''हम जिंदगियां बचाना चाहते हैं।''