19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

164 तालाबों के 1680 हैक्टेयर पानी में हर वर्ष निकल रही 29 सौ मीट्रिक टन मछली

-1 हजार परिवार कर रहे मछली पालन, इनमें किसान भी शामिल

2 min read
Google source verification
164 तालाबों के 1680 हैक्टेयर पानी में हर वर्ष निकल रही 29 सौ मीट्रिक टन मछली

164 तालाबों के 1680 हैक्टेयर पानी में हर वर्ष निकल रही 29 सौ मीट्रिक टन मछली

श्योपुर। मछली पालन के मामले में श्योपुर चंबल संभाग के जिलों में सबसे अव्वल रहा है। जिले के 164 तालाबों के 1680 हैक्टेयर पानी और नदियों से हर वर्ष 29 सौ मीट्रिक टन मछली निकल रही है। 156 तालाबों के 438.45 हैक्टेयर पानी में 85 स्वयं सहायता समूह से जुड़कर 1 हजार परिवारों को आजीविका के लिए काम कर रहे हैं। उत्पादन से हर वर्ष मछली उत्पादकों को 2 करोड़ 29 लाख रुपए की आय हो रही है। अब इस आय में और वृद्धि करने के लिए स्थानीय स्तर पर बीज उत्पादन का काम भी शुरू होगा। इससे किसानों की लागत में कमी आएगी और आय बढ़ेगी।


इन किस्मों की है सबसे ज्यादा मांग
-जिले में उत्पादित पंगेशियस, रोहू, कतला, मृगला, कॉमन शार्क, ग्रास शार्क, सिल्वर शार्क की मांग सबसे ज्यादा है।


एक नजर में जल क्षेत्र
-समितियों को दिए गए 156 तालाबों का जल क्षेत्र 438.45 हैक्टेयर है।
-मछली उत्पादन के लिए 85 स्वयं सहायता समूहों को तालाब 10 वर्ष के लिए पट्टे पर दिए गए हैं।
-एक किसान को प्रति सीजन 2 से 5 लाख रुपए तक की आय हो रही है।
-पनवाड़ा, खिरखिरी सहित 8 गांवों में तालाबों से सिंचाई के साथ मछली पालन हो रहा है।
-कुल 164 तालाबों के 1680 हैक्टेयर जल क्षेत्र में छह से आठ महीने में एक क्रॉप तैयार हो जाती है।


यह है नई तैयारी
-झींगा, फिशमील आइस प्लांट के लिए हितग्राहियों का चयन किया जा रहा है।
-फिश पार्लर बनाने की योजना भी बनाई जा रही है।
-पंगेशियस, रोहू मछली का बीज स्थानीय स्तर पर उत्पादन शुरू होगा।
-निजी क्षेत्र में मत्स्य बीज उत्पादन को प्रोत्साहन शुरू किया जा रहा है।


इन मछलियों की ज्यादा मांग
-श्योपुर के तालाबों में रोहू, पंगेशियस सहित अन्य देशी किस्मों का उत्पादन हो रहा है।
-सबसे ज्यादा मांग जिले में उत्पादित हो रही रोहू मछली की है।


वर्सन
-जिले के कराहल, श्योपुर और विजयपुर तीनों ही ब्लॉक में मत्स्य पालन को लेकर किसान और समितियां अब बेहतर काम कर रहे हैं। कुल 164 तालाबों के 1880 हैक्टेयर जल क्षेत्र में मत्स्य पालन किया जा रहा है। अब हम बीज उत्पादन, फिश पार्लर आदि को लेकर भी काम कर रहे हैं ताकि किसानों की लागत कम की जा सके।
बीपी झास्या, सहायक संचालक-मत्स्य पालन