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बड़ी खबर : MP में यहां मिली हजारों साल पुरानी गुफाएं,लाखों की संख्या में देखने उमड़ी लोगों की भीड़

पुरातत्व विभाग की नई गुफाओं की खोज की है। ये पुरानी गुफाओं से जंगल में लगभग दो किलोमीटर अंदर हैं

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old caves

10000 year old caves

ग्वालियर। पहाडग़ढ़ के लिखी छाज नामक स्थान पर तीन और गुफाएं मिली हैं। जिनमें अन्य गुफाओं की तरह दीवारों व छतों पर अमिट शैल चित्र बने हुए हैं। इस खोज के बाद लिखी छाज में गुफाओं की संख्या 85 हो गई है। गुफाओं की मिलने की जानकारी मिलते ही भारी संख्या में लोगों की भीड़ एकत्र हो गई है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि संबंधित क्षेत्र में इस तरह की कुछ और गुफाएं भी हो सकती हैं। निचली बहराई से कुछ दूर जंगल में सूखी नदी के किनारे गुफाओं की जानकारी तकरीबन ८० वर्ष पहले मिली थी। इन गुफाओं में पत्थरों की दीवारों व छतों पर हाथी, शेर, कुत्ते, बिल्ली सहित अन्य जानवरों के अमिट शैल चित्र बने हुए हैं। इसके अलावा शिकारी तथा समूह में चली जा रहीं महिलाओं के चित्र भी बहुतायत में हैं।

पुरातत्व विशेषज्ञों के मुताबिक ७१७ बीघा क्षेत्रफल में फैली ये गुफाएं 10 हजार से अधिक वर्ष पुरानी हो सकती हैं। अभी सप्ताहभर पहले पुरातत्व विभाग की एक टीम ने तीन और नई गुफाओं की खोज की है। ये पुरानी गुफाओं से जंगल में लगभग दो किलोमीटर अंदर हैं।

इन गुफाओं में भी तरह-तरह के शैल चित्र बने हुए हैं। संभावना व्यक्त की जा रही है कि लिखी छाज क्षेत्र में इस तरह की कुछ और गुफाएं भी हो सकती हैं। बहुत जल्द पुरातत्व विभाग की टीम इस क्षेत्र का भ्रमण कर गुफाओं की तलाश करेगी।

शैल चित्रों की लिस्टिंग होगी
लिखी छाज नामक स्थान पर गुफाओं की संव्या तो ज्ञात है,लेकिन इनमें उकेरे गए शैल चित्रों की गिनती अभी तक नहीं की जा सकी है। अब पुरातत्व विभाग ने शैल चित्रों की लिस्टिंग कराने का प्लान बनाया है।

बताया गया है कि लिस्टिंग पर होने वाले खर्च की व्यवस्था के लिए एक प्रस्ताव इंटेक को भेजा जाएगा। वहां से बजट स्वीकृत होते ही लिखी छाज मेंं शैल चित्रों की गिनती शुरू करा दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि लिखी छाज को संरक्षित स्मारक घोषित किए जाने के प्रयास भी सरकारी स्तर पर चल रहे हैं।


"लिखी छाज नामक स्थान पर तीन और गुफाएं मिलने के बाद इनकी संख्या ८५ हो गई है। हो सकता है, संबंधित क्षेत्र में इस तरह की कुछ और गुफाएं भी हों। बहुत जल्द इन गुफाओं में बने शैल चित्रों की लिस्टिंग कराई जाएगी।"
अशोक शर्मा, जिला पुरातत्व अधिकारी