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हनीमून कपल्स के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं ये 5 पर्यटन स्थल

जानिए उन पर्यटन स्थलों के बारे में, जहां जाना न केवल फाइनेंसियली सस्ता पड़ता है वरन हमेशा के लिए याद रहने वाला अनुभव भी बन जाता है

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Sunil Sharma

Sep 24, 2015

Honeymoon

Honeymoon

चलता ही जाता हूं राह निहारे, चाहे हो पहाड़ या झरनों के किनारे। लहलहाते पेड़, खिलखिलाते फूल। खड़े हैं रास्ते में बांह पसारे। कैसी है मोहक प्रकृति की यह सुंदरता... यह कविता इन दिनों देश भर के पर्यटन स्थलों के लिए सच साबित हो रही है। लगभग सभी पर्यटन स्थलों पर प्रकृति अपने पूरे श्रृंगार में है। चारों ओर हरियाली की चादर है। झरने जी उठे हैं। शीतल हवा के झोंकों के बीच पेड़ों की शाखाएं पत्तियों के साथ झूमकर सैलानियों का स्वागत कर रही हैं। अब आप भी उन पर्यटन स्थलों के बारे में जानिए जहां जाना न केवल फाइनेंसियली सस्ता पड़ता है वरन हमेशा के लिए याद रहने वाला अनुभव भी बन जाता है।



पातालपानी झरना


एक ओर अहिंसा पर्वत, दो तरफ चट्टानें और बीचो-बीच कल-कल करती दो पहाड़ी नदियां। पहाडियों पर हरी चादर में लिपटे झूमते पेड़ सैलानियों का मन मोह लेते हैं। दो पहाड़ी नदियों का पानी 300 फीट की ऊंचाई से कल-कल कर गिरते देखना सुखद अनुभूति देता है।


स्थिति : इंदौर-खंडवा रेल मार्ग पर स्थित इस स्थान पर सैलानियों के लिए पातालपानी स्टेशन है।


ऎसे जाएं : इंदौर से 27 किलोमीटर दूर समुद्र तल से 572 मीटर की ऊंचाई पर बने इस लुभावने स्थान तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग बेहतर है। इंदौर से महू की 21 किलोमीटर की दूरी और फिर 6 किलोमीटर की दूरी पर इस दृश्य का नजारा लिया जा सकता है।




चोरल नदी

चारों ओर सिर उठाए पहाड़ और इन पर घटाओं को चूमते पेड़। दूसरी ओर इंदौर-खंडवा सड़क और बीचों-बीच नदी। इसी किनारे पर्यटन निगम के बनाए दो-तीन झोपड़ीनुमा शेड। हरी चादर में लिपटी पहाडियों के बीच चोरल नदी का शोर दर्शकों का मन मोह लेता है।


स्थिति: इंदौर-खंडवा रेलमार्ग पर स्थित चोरल स्टेशन भी है। यहां उतरने के साथ सैलानियों को नदी के पिकनिक स्पॉट पर ले जाने के लिए कई स्थानीय वाहन की व्यवस्था होती है।


कैसे जाएं: इंदौर से महज 40 किलोमीटर दूर। इस स्थान पर सड़क मार्ग से जाया जा सकता है।


सतर्कता : चोरल नदी के दूसरी ओर पहाडियों पर होने वाली बारिश से एकाएक जलस्तर बढ़ता है। ऎसे में यहां पंचायत के चौकीदार सीटियां बजाकर बारिश में नदी में उतरने से मना करते हैं। चेतावनी को अनसुना करना खतरनाक है, इसलिए यहां चेतावनी पर ध्यान देना जरूरी है।




सीतलामाता फॉल


सीतलामाता फॉल चारों ओर पहाडियों से घिरा है। बारिश में यहां दर्जनभर से ज्यादा झरने जीवंत होते हैं। करीब 350 फीट सीढियां उतरने के दौरान भी मनोरम नजारा सैलानियों का मन मोह लेता है। लंगूर व बंदरों को पेड़ व चट्टानों पर उछलकूद करना प्रकृति के बेहद करीब लाता है।


स्थिति: महू तहसील के इस फॉल तक का रास्ता सड़क से है। निजी वाहनों से पहले मानपुर और फिर 5 किलोमीटर की यात्रा करनी होती है।


कैसे जाएं: इंदौर से 43 किलोमीटर की दूरी पर यह स्थान एबी रोड पर स्थित है। इंदौर से 38 किलोमीटर दूर मानपुर और फिर 5 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है।


सतर्कता : फॉल निहारने के लिए कुंड के पास जाना होता है। यहां चौकीदारों की तैनाती भी है। लेकिन एक साथ दर्जनभर झरने को देख सैलानी मुग्ध हो जाते हैं। वे कुंड उतर आते हैं। इससे दुर्घटनाएं होती हैं।अत: सुरक्षा बेहद जरूरी है।




कजलीगढ़

कजलीगढ़ - महू तहसील के सिमरोल गांव का बेहद पुराना स्थान। यहां होलकरकालीन किला भी मौजूद है। शिकारगाह के लिए मशहूर रहा यह स्थान रहस्य से भरपूर है। एक ओर किला, दूसरी ओर शिव मंदिर और यहीं बहता झरना सुखद लगता है।

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स्थिति: किले के विशाल दरवाजे के पास साधु-संतों का डेरा है। किलेनुमा परकोटे में दूर तक फैले सन्नाटे को चीरती हवा चलती है। परकोटे के सीढ़ीदार गुंबद किले के स्थापत्य कला की कहानी कहती है।


कैसे जाएं: इंदौर से बीस किलोमीटर दूर इस स्थान पर सिमरोल के रास्ते जाया जा सकता है। यहां से कजलीगढ़ के लिए मुड़ते ही हरे-भरे खेत-खलिहान मन मोह लेते हैं।

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मांडू

मांडू का दर्शन कश्मीर का आभास देता है। यहां हरी-भरी वादियां, नर्मदा का सुरम्य तट ये सब मिलकर मांडू को मालवा का स्वर्ग बनाते हैं। चार वंशों परमार काल, सुल्तान काल, मुगल काल और पवार काल का कार्यकाल देख चुका मांडू जहाज महल चर्चित स्मारक है।


स्थिति: चारों ओर पानी से घिरे होने के कारण यह जहाज का दृश्य बनाता है। इसकी आकृति टी के आकार की है। इसका निर्माण परमार राजा मुंज के समय हुआ किंतु इसके सुदृढ़ीकरण का श्रेय गयासुद्दीन खिलजी को है।


कैसे जाएं : एबी रोड स्थित इस स्थान पर इंदौर से सड़क मार्ग के जरिए जाया जा सकता है। 94 किलोमीटर की दूरी पर इस स्थान तक पहुंचने के लिए 1 घंटा 55 मिनट खर्च करने पड़ते हैं। हालांकि यहां पहुंचने के बाद सैलानियों की सारी थकान पलभर में ही काफूर हो जाती हैं।




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