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ग्वालियर। शहर के कमलाराजा अस्पताल के स्त्री रोग विभाग के पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में रविवार रात करीब १० बजे भर्ती ५० प्रसूताएं एंटीबायोटिक इंजेक्शन के रिएक्शन सेबीमार पड़ गईं। इनमें से पांच को गंभीर हालत में आईसीयू में शिफ्ट किया गया। एंटीबायोटिक इंजेक्शन एमपी सिलिन लगने के 15 मिनट बाद प्रसूताओं को बुखार व कंपकंपी आने लगी। इससे दोनों पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में अफरा-तफरी मच गई। ड्यूटी पर तैनात स्टाफ में हड़कंप मच गया। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सूचना मिलते ही स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वृंदा जोशी व डॉ. रीता मिश्रा मौके पर पहुंची और बीमार प्रसूताओं की नब्ज टटोली। कुछ देर बाद प्रसूताओं की स्थिति नियंत्रण में आ गई।
ऑपरेशन के बाद दो पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में भर्ती प्रसूताओं को यह रिएक्शन हुआ। सीमा पत्नी मुकेश, मीना पत्नी भूपेन्द्र, पूजा पत्नी गुलकंद, रानी पत्नी धर्मेन्द्र व एक अन्य को हालत ज्यादा खराब होने पर आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ा। इंजेक्शन लगने के बाद कोई महिला कांप रही थी, तो कोई उल्टी कर रही थी किसी तो दस्त की शिकायत होने लगी।
इन प्रसूताओं की हालत बिगड़ी
नमिता ग्वालियर, गायत्री गोहद, काजल ग्वालियर, रीना छरेटा, नीतू गोहद, अजुम ग्वालियर, संजना डबरा, ममता भिण्ड, सीमा गुप्ता दमोह, सुमन सिकंदर कम्पू, नेहा आपागंज, राधा भितरवार, सोनिया घोसीपुरा, आभा तोमर थाटीपुर, रूमा नौगांव, रूकमणी ताल का पुरा, सुमन भदौरिया ग्वालियर, पूजा शेरपुरा, रेनू जादौन जेतपुरा, मायावती सिलोली, पूजा बाथम कैलाश टॉकीज, रिया बंसल ग्वालियर, रूकसार आनंदनगर, विमलेश सेन गोलपहाडि़या, पूनम चावला, शिवकुमारी भिण्ड, अंजली गोलपहाडि़या, रीना प्रजापति हुजरात पुल, नीतू शर्मा मुरार, मंजली माधवगंज, रेखा हजीरा, नीतू भिण्ड, गिरजा हजीरा, खुशबू सिंह फूफ, खुशबु दुबे भिण्ड, लक्ष्मी, ममता शिवपुरी, आशा छरेटा, गायत्री झा मुरार, राधा मुरैना, भारती बाथम, नारायणी बाई राजगढ़, आशा तारागंज, प्रीति भिण्ड व उर्मिला शामिल हैं।
नहीं पहुंचे डीन
घटना के बाद भी जीआरएमसी डीन डॉ. एसएन आयंगर मौके पर नहीं पहुंचे। प्रभारी अधीक्षक डॉ. संजय सिंह चंदेल मौके पर पहुंचे। परिजनों ने इंजेक्शन के रिएक्शन की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर की। जिसमें परिजन लापरवाही की बात कह रहे थे। रानी के पति धर्मेन्द्र ने स्टाफ को बताया लेकिन अनसुना कर दिया गया।
"प्रसूताओं को रिएक्शन एमपी सिलिन इंजेक्शन को लगाने वाले डिस्टल वॉटर से भी हो सकता है। इंजेक्शन रोजाना मरीजों को लगाया जा रहा है, खासबात है कि अस्पताल में इंजेक्शनों को डायल्यूट करने डिस्टल वाटर की जगह नॉर्मल पानी उपयोग होताहै।"
डॉ.रीता मिश्रा, केआरएच की सहायक अधीक्षक
"फिलहाल इंजेक्शन पर रोक लगा दी गई है। इंजेक्शन के सैंपल जांच के लिए भेजे जाएंगे। साथ ही पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। आखिर एेसा कैसे हुआ।"
डॉ.संजय सिंह चंदेल, प्रभारी अधीक्षक जेएएच
Published on:
30 Oct 2017 01:42 pm

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