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लाखों लोगों को होगा फायदा, 146 km के झांसी-धौलपुर रूट का 80% काम पूरा

MP News: रेलवे अधिकारियों के अनुसार, फेंसिंग का काम पूरा होते ही इस रूट पर ट्रेनों के संचालन की गति 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक बढ़ाई जा सकेगी। इससे यात्रा समय में कमी आएगी।

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Jhansi-Dholpur route

Jhansi-Dholpur route (Photo Source: AI Image)

MP News: झांसी से धौलपुर के बीच 146 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक पर सुरक्षा को लेकर बड़ा बदलाव किया जा रहा है। इस पूरे सेक्शन में करीब 80 प्रतिशत हिस्से में मेटल बीम फेंसिंग का काम पूरा हो चुका है, जिससे ट्रैक पहले की तुलना में काफी सुरक्षित हो गया है। ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में रेलवे ट्रैक पर सबसे बड़ी समस्या पशुओं के अचानक ट्रैक पर आ जाने की रही है।

यह एक अत्यंत व्यस्त रूट है, जहां थोड़े-थोड़े अंतराल पर ट्रेनों का आवागमन होता रहता है। ऐसे में पशुओं की आवाजाही से ट्रेनों की गति प्रभावित होती रही है। कई बार शताब्दी, वंदे भारत और राजधानी जैसी प्रमुख ट्रेनें भी इससे प्रभावित होती हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए रेलवे ने मेटल बीम फेंसिंग का कार्य तेजी से कराया है।

साल के अंत तक पूरा होगा प्रोजेक्ट…

रेलवे ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को चालू वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। काम की प्रगति को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि यह तय समय सीमा में पूरा हो जाएगा, जिससे ग्वालियर समेत पूरे क्षेत्र के यात्रियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार का रास्ता होगा साफ

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, फेंसिंग का काम पूरा होते ही इस रूट पर ट्रेनों के संचालन की गति 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक बढ़ाई जा सकेगी। इससे यात्रा समय में कमी आएगी।

ऐसे समझें फेंसिंग का महत्व

मेटल बीम फेंसिंग इतनी ऊंची और मजबूत होती है कि जानवर आसानी से इसे पार कर ट्रैक तक नहीं पहुंच पाते। इससे न केवल पशुओं की आवाजाही रुकेगी, बल्कि ट्रैक पर अनधिकृत प्रवेश और वाहनों के पहुंचने की घटनाओं में भी कमी आएगी। परिणामस्वरूप ट्रेन संचालन अधिक सुरक्षित, सुचारु और समयबद्ध हो सकेगा।

इनका कहना है….

रेलवे ट्रैक पर जानवरों के आने से ट्रेनों के संचालन में परेशानी होती है और समय प्रभावित होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए मेटल बीम फेंसिंग का कार्य किया जा रहा है। झांसी से धौलपुर के बीच लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। - मनोज कुमार सिंह, पीआरओ, झांसी मंडल