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आरटीओ ई-चालान के नाम पर 9 लाख ठगे, एपीके फाइल भेजकर 23 दिन तक किया इंतजार, खाता ‘मोटा’ होते ही 3 बार में साफ की रकम

– ठगी का शातिराना तरीका: 25 दिसंबर को फाइल भेजकर फोन किया हैक, जासूस बनकर फोन में बैठे रहे ठग बिना सोचे-समझे लिंक क्लिक करना पड़ा भारी ग्वालियर. साइबर ठगों ने अब ठगी का ऐसा तरीका अपनाया है कि अच्छे-भले पढ़े-लिखे लोग भी उनके जाल में फंस रहे हैं। ग्वालियर के एक प्रॉपर्टी कारोबारी को […]

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- ठगी का शातिराना तरीका: 25 दिसंबर को फाइल भेजकर फोन किया हैक, जासूस बनकर फोन में बैठे रहे ठग बिना सोचे-समझे लिंक क्लिक करना पड़ा भारी

ग्वालियर. साइबर ठगों ने अब ठगी का ऐसा तरीका अपनाया है कि अच्छे-भले पढ़े-लिखे लोग भी उनके जाल में फंस रहे हैं। ग्वालियर के एक प्रॉपर्टी कारोबारी को आरटीओ के ई-चालान का झांसा देकर 9 लाख रुपए की ठगी कर डाली। ठगों ने सिर्फ एक एपीके फाइल भेजकर न केवल उनका फोन हैक किया, बल्कि 23 दिनों तक जासूस बनकर उनके बैंक खाते में बड़ी रकम आने का इंतजार किया। जैसे ही खाते में मोटा पैसा दिखा, ठगों ने तीन किस्तों में पूरी रकम पार कर दी।

बड़ागांव निवासी विजय सिंह अपनी जमीनों की खरीद-फरोख्त का लेन-देन पत्नी के बैंक खाते से करते हैं। 25 दिसंबर को उनके मोबाइल पर आरटीओ ई-चालान के नाम से एक एपीके फाइल आई। विजय को लगा कि शायद गाड़ी का कोई चालान कटा है, इसलिए उन्होंने बिना सोचे-समझे फाइल डाउनलोड कर ली। फाइल डाउनलोड होते ही उनका फोन कुछ देर के लिए हैक हुआ, जिसे उन्होंने सामान्य तकनीकी दिक्कत समझकर नजरअंदाज कर दिया। यहीं से ठगों का साइबर जासूस उनके फोन के बैकग्राउंड में एक्टिव हो गया।

खाता मोटा होते ही 16 जनवरी को लगाया झटका

ठगों ने जल्दबाजी नहीं की। उन्होंने पूरे 23 दिन तक विजय के फोन की हर गतिविधि पर नजर रखी। 16 जनवरी को जैसे ही खाते में पर्याप्त बैलेंस दिखा, ठगों ने तीन ट्रांजेक्शन में 4,49,000 रुपए, 1,50,660 रुपए और 3,45,522 रुपए (कुल करीब 9 लाख) निकाल लिए। मोबाइल पर मैसेज आने के बाद विजय सिंह के होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत बैंक को सूचित किया और 'जीरोएफआईआर' दर्ज कराई, जिसके आधार पर मुरार पुलिस ने मामला दर्ज किया है।

सावधान: क्या है एपीके फाइल ?

साइबर अपराधी आजकल एपीके(एंड्रॉयड पैकेज किट) फाइल का इस्तेमाल हथियार की तरह कर रहे हैं। ये फाइलें बहुत छोटी होती हैं और व्हाट्सएप या एसएमएस के जरिए भेजी जाती हैं।

- कैसे काम करती हैं: डाउनलोड होते ही ये मोबाइल के बैकग्राउंड में एक जासूसी सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर देती हैं।

- क्या करती हैं: ये सॉफ्टवेयर आपके मैसेज (ओटीपी ), कॉल रिकॉर्डिंग, गैलरी और बैंक डिटेल को ठगों तक पहुंचाते रहते हैं।

- नतीजा: ठग आपके फोन का रिमोट एक्सेस ले लेते हैं और बिना आपकी जानकारी के ट्रांजेक्शन कर देते हैं।

एक्सपर्ट एडवाइज: ठगी से बचने के मंत्र:

1. अनजान लिंक से तौबा: व्हाट्सएप, टेलीग्राम या एसएमएस से आए किसी भी लिंक या फाइल को डाउनलोड न करें।

2. प्ले स्टोर ही भरोसा:ऐप हमेशा गूगल प्ले स्टोर से ही डाउनलोड करें। थर्ड पार्टी वेबसाइट या फाइल खतरनाक हो सकती है।

3. परमिशन चेक:ऐप इंस्टॉल करते समय अगर फोन से अनुमति मांगे, तो सावधान हो जाएं।

इनका कहना है:

साइबर अपराधी एपीके फाइल के जरिए फोन हैक कर रहे हैं। ये फाइलें फोन यूजर की हर गतिविधि को रिकॉर्ड करती हैं। अनजान नंबर से आई ऐसी किसी भी फाइल को बिल्कुल डाउनलोड न करें। किसी भी एप को हमेशा आधिकारिक प्ले स्टोर से ही लोड करें।

— संजीव नयन शर्मा, डीएसपी, स्टेट साइबर सेल, ग्वालियर