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व्यक्तित्व को निखारता है अभिनय

- आर्टिस्ट्स कंबाइन इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट की व्याख्यानमाला

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व्यक्तित्व को निखारता है अभिनय

व्यक्तित्व को निखारता है अभिनय

ग्वालियर. अभिनय किसी भी इंसान के व्यक्तित्व को निखार देता है। नाट्यशास्त्र में लिखित अभिनय के चार तत्व आंगिक, वाचिक, सात्विक व आहार्य के साथ अभिनय का अपना अलग ही महत्व है। यह बात संगीत विश्वविद्यालय के नाट्य एवं रंगमंच संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ.हिमांशु द्विवेदी ने मंगलवार को आर्टिस्ट्स कंबाइन इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट की व्याख्यानमाला सत्र 2021-22 के दौरान कही। दाल बाजार स्थित नाट्य मंदिर में हुई व्याख्यानमाला में उन्होंने अभिनय शैलियां एवं परंपरा विषय पर व्याख्यान दिया। डॉ.द्विवेदी ने अभिनय की विभिन्न प्रकार की शैलियां बुंदेली परंपरा, प्रयोगवादी परंपरा, जो भारत में अभी प्रचलित हैं, अलग-अलग राज्यों में आज भी खेली जाती है उनके बारे में भी बहुत ही रोचक प्रसंगों के जरिए समझाया। डॉ.द्विवेदी ने पाश्चात्य रंगमंच की विभिन्न शैलियों जैसे रोमन शैली, ग्रीक शैली आदि की जानकारी भी दी तथा स्तानीस लाव्हिस्की के मेथड एक्टिंग के बारे में विद्यार्थियों को परिचित कराया। उन्होंने बताया कि भारतीय और पाश्चात्य अभिनय की शैलियों में क्या अंतर है। कार्यक्रम के अंत में डॉ.द्विवेदी ने विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए। इस मौके पर प्राचार्य डॉ.संजय लघाटे, सुयश त्रिपाठी आदि मौजूद थे। संचालन ऋषभ उपाध्याय ने और संचालन रोहित जैन ने किया।