
नृत्य के दौरान नीलांजना की मौत देख आदिकुमार को हुआ वैराग्य
ग्वालियर. जब इंसान के मन में वैराग्य भाव जाग्रत हो जाता है तो सभी रिश्ते-नातों और राजपाट छोडक़र भगवान की साधना में लीन हो जाता है। युवराज आदिकुमार के साथ भी ऐसा ही हुआ, दरबार में नृत्य कर रही नृत्यांगना नीलांजना की मृत्यु हो जाती है तो आदिकुमार का मन दीन-दुनिया से विरत हो जाता है और उनके मन में वैराग्य भाव आ जाता है। बरई जिनेश्वरधाम में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव के दौरान मंगलवार को महाराजा नाभिराय के दरबार में नीलांजना नृत्य कर रही थी, तभी अचानक उसकी मौत हो जाती है। यह देख युवराज आदिकुमार बेहद दु:खी होते हैं और उनके मन में वैराग्य का भाव आ जाता है। मन में वैराग्य भाव उत्पन्न होते ही आदिकुमार अपना राजपाट भारत-बाहुबली को सौंपकर पालकी में बैठ भगवान की साधना करने वन में चले जाते हैं। वहां उनकी दीक्षा विधि की क्रियाएं होती हैं। सुबह तप कल्याणक के उत्तरार्ध में जिनेन्द्रदेव का अभिषेक, शांतिधारा के बाद तप कल्याणक की पूजन की गई। रात में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ।
भरत-बाहुबली बने सगे भाई
मीडिया प्रभारी ललित जैन ने बताया कि यह संयोग ही रहा कि पंचकल्याणक में भरत-बाहुबली की भूमिका निभाने का मौका भी दो सगे भाइयों को मिला। जब अयोध्या के राजा आदिकुमार वैराग्य भाव आने पर राजपाट अपने बेटों भरत-बाहुबली को सौंपते हैं, इसके लिए जिनेश्वरधाम ट्रस्ट के सह कोषाध्यक्ष मुकेश जैन बाहुबली और उनके बड़े भाई नरेश जैन ने भरत की भूमिका निभाई।
मुनि देते हैं सदमार्ग चलने की प्रेरणा
इस अवसर पर आचार्य विशुद्ध सागर ने कहा कि मुनि का पद वंदनीय होता है। मुनि हमेशा अपने श्रावकों को सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि इंसान अपने भावों से ही उठता है और भावों से ही गिरता है। भावों से पाप भी हो सकता है और मोक्ष भी मिल सकता है।
Published on:
11 Dec 2019 12:39 am
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