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बांधे हैं मजहब की डोर, करवा चौथ के लिए करवा तैयार करते हैं अली-सलमा

-साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल -हिंदू पर्व करवा चौथ के लिए करवा तैयार करते हैं मुस्लिम हाथ-शहर में वर्षों से चली आ रही परंपरा

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Karva Chauth

ग्वालियर। हिंदू महिलाओं के सुहाग के पर्व करवा चौथ में करवा का विशेष महत्व है। आमतौर पर मिट्टी और शक्कर दो तरह के करवा महिलाएं पूजन में उपयोग में लेती हैं। ग्वालियर शहर में पिछले कई वर्षों से शक्कर के करवा बनाने के छोटे-बड़े करीब 50 कारखाने काम कर रहे हैं। खास बात यह है कि हिंदू महिलाओं के करवा चौथ पूजन के लिए शक्कर के जो करवा तैयार होते हैं वो मुस्लिम हाथों से बनते हैं।

करवा तैयार करने वाले ये मुस्लिम परिवार इन करवों को पाक (शुद्ध) तरीके से बनाते हैं क्योंकि उनका मानना है कि इन करवों से हिंदू बहनों के अखंड सुहाग की बात जुड़ी है। कहने को तो उपनगर ग्वालियर और हुजरात रोड के ये मुस्लिम परिवार पेट की खातिर इस काम को करते हैं लेकिन कहीं ना कहीं साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल भी पेश कर रहे हैं। एक ओर जहां हिंदू महिलाएं चंद्रमा को देखकर अर्र्घ्य देती हैं वहीं मुस्लिम भी ईद के लिए पहले चांद को ही देखते हैं।

चांद तो हिंदू-मुस्लिम दोनों के लिए ही खास

उपनगर ग्वालियर में कई पीढ़ियों से करवा बनाने का काम करने वाले मुन्ने खां और कनीजा बेगम ने बताया कि हमारा पूरा परिवार कड़ी मेहनत करके शक्कर के ये करवा तैयार करता है। चूंकि इन्हें चंद्रमा पूजन के उपयोग में लिया जाता है इसलिए उनके पाक रहने का खास ध्यान रखा जाता है। चांद तो हिंदू-मुस्लिम दोनों के लिए ही खास है क्योंकि एक ओर जहां हिंदू महिलाएं चंद्रमा को देखकर अर्घ्य देती हैं वहीं मुस्लिम भी ईद के लिए पहले चांद को ही देखते हैं।

कई पीढ़ियों से कर रहे हैं काम

हुजरात रोड पर करवे बनाने वाले हाजी अनीस अहमद और साकिर खान ने बताया कि हम ये काम पिछली कई पीढ़ियों से करते आ रहे हैं। इन करवों को बनाने के लिए अच्छी शक्कर का उपयोग करते हैं।

ऐसे तैयार होता है शक्कर का करवा

यूं तो शक्कर का करवा करीब 10 मिनट में बनकर तैयार हो जाता है, लेकिन इसे बनाते समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाता है। शक्कर का करवा बनाने के लिए पहले चाशनी बनाई जाती है। इस चाशनी को मिट्टी के करवा रूपी सांचों में भरा जाता है। ये सांचे भी खास तरह के होते हैं। मिट्टी के ये सांचे अलग-अलग हिस्सों में बंट जाते हैं, इन्हें बांधने के लिए काले रंग के रबर बैंड का इस्तेमाल किया जाता है। इन सांचों में शक्कर की चाशनी भरने के बाद करीब पांच मिनट बाद उसे बाहर निकाला जाता है। करवा तैयार करने वाला एक परिवार एक दिन में 100 से 150 करवा तैयार कर लेता है। वहीं बाजार में ये करवा 10 रुपए से लेकर 100 रुपए तक बिकते हैं।

रोहणी नक्षत्र में तोड़ा जाएगा व्रत

अखंड सुहाग के करवा चौथ के व्रत की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। गुरुवार 13 अक्टूबर को करवा चौथ का व्रत है। ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि उदयातिथि के नियमानुसार करवा चौथ का व्रत 13 अक्टूबर को ही रखा जाएगा। पूजा मुहूर्त शाम 5.54 बजे से 7.09 बजे तक, पूजा अवधि 1 घंटा 15 मिनट तक रहेगी। करवा चौथ के दिन चंद्र देव रोहिणी नक्षत्र में रात 8.09 बजे दर्शन देंगे। इस नक्षत्र में व्रत रखना बेहद शुभ होता है।