
जैन धर्म की शिक्षा के साथ-साथ सीख रहे संस्कार भी
ग्वालियर. शहर में पहली बार 18 दिवसीय विज्ञान आध्यात्मिक शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर का आयोजन लक्ष्मीबाई कॉलोनी स्थित मिसहिल स्कूल में किया जा रहा है। 7 जून तक लगने वाले इस शिविर में देश भर के 500 से अधिक प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इस शिविर की खास बात यह है कि इसमें बालकों और युवाओं को जैन धर्म की शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों की जानकारी भी दी जा रही है। शिविर से अध्यापक बनकर ये शिक्षक जैन शिक्षण संस्थाओं में जैन धर्म की शिक्षा देंगे। शिविर में प्रयोगात्मक पद्धति एवं मनोवैज्ञानिक शिक्षण विधियां भी सिखाई जा रही हैं। शिविर में रोजाना शहर से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं।
ये हो रहे कार्यक्रम
इस आध्यात्मिक शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर में सुबह 5.15 बजे से लेकर रात 10 बजे तक प्रशिक्षण कार्यक्रम से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे हैं। इनमें प्रौढ़ कक्षा, नित्य-नियम पूजन, सैद्धांतिक प्रशिक्षण कक्षाएं बालबोध, प्रवेशिका, प्रशिक्षण अभ्यास कक्षाएं, विद्वानों के प्रवचन सहित रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जा रहे हैं। शिविर में सुमतप्रकाश खनियांधाना, अभय कुमार शास्त्री जबलपुर, डॉ.शांतिकुमार पाटिल जयपुर, डॉ.मनीष मेरठ, राजकुमार उदयपुर, अध्यात्मप्रकाश भारिल्ल मुंबई आदि प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।
धर्म-संस्कार की शिक्षा दे रहे
जैन समाज के इस शिविर में बालकों और युवाओं को जैन धर्म के साथ-साथ संस्कारों की शिक्षा भी दी जा रही है। शिविर से अध्यापक बनकर ये शिक्षक जैन शिक्षण संस्थाओं में शिक्षा प्रदान करेंगे। शिविर 21 मई से प्रारंभ किया गया था, जो 7 जून तक लगेगा।
- मुकेश जैन, अध्यक्ष, वीतराग विज्ञान आध्यात्मिक शिक्षण प्रशिक्षण शिविर समिति
इससे पूर्व महाराष्ट्र में भी प्रशिक्षण लिया था
मेरी उम्र 16 है और अभी प्रथम वर्ष में अध्ययनरत हूं। इससे पूर्व महाराष्ट्र में भी प्रशिक्षण लिया था। दो प्रशिक्षण करने के बाद बच्चों को धार्मिक शिक्षा देने का दायित्व दिया जाता है। सुबह से रात तक विद्वान प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रवचन के साथ ज्ञान की बातें भी सीखने को मिलती है।
- श्रेयांस जैन, राजस्थान
देश भर के बच्चे सीख रहे हैं
इस शिविर में ज्ञान पाठ, इंद्रियां, कषाय आदि कई बातों का अध्ययन किया है। अभी 11वी कक्षा में अध्ययनरत हूं। यहां पूरे देश भर के बच्चों के साथ ज्ञान की बातें सीखने का मौका मिल रहा है। आगे यही शिक्षा हमें भी सिखानी होगी।
- प्रिंस कुमार जैन, झालावाड़ कोटा
Published on:
04 Jun 2023 11:01 pm
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