12 अगस्त 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

जज्बे से जीती मौत से जंग, अब सपना नीडी की मदद करना

लास्ट ईयर मई में मुझे ब्रेस्ट कैंसर के बारे में मालूम चला। मैंने ग्वालियर में चेकअप कराने के बाद दिल्ली का ट्रीटमेंट लिया। तब मैंने सोचा कि अब मेरा जितना जीवन शेष बचा है, वे मैं दूसरों के लिए समर्पित करूंगी। इसी सोच के साथ मैंने पैड वुमन फांडेशन पर काम किया।
2 min read
Google source verification
cancer

जज्बे से जीती मौत से जंग, अब सपना नीडी की मदद करना,जज्बे से जीती मौत से जंग, अब सपना नीडी की मदद करना

ग्वालियर. लास्ट ईयर मई में मुझे ब्रेस्ट कैंसर के बारे में मालूम चला। मैंने ग्वालियर में चेकअप कराने के बाद दिल्ली का ट्रीटमेंट लिया। तब मैंने सोचा कि अब मेरा जितना जीवन शेष बचा है, वे मैं दूसरों के लिए समर्पित करूंगी। इसी सोच के साथ मैंने पैड वुमन फांडेशन पर काम किया। पिछले साल मैं शहर के आसपास पैड डिस्ट्रीब्यूट करने के साथ बीकानेर बॉर्डर पर भी गई और वहां मजदूर महिलाओं को अवेयर किया। यह कहना है कैंसर सर्वाइवर किरण वाजपेयी का, जो इस समय दिल्ली का ट्रीटमेंट ले रही हैं।

कीमो के दौरान केबीसी का दिया ऑडिशन

बीमारी के दौरान मैंने कभी भी अपने जज्बे को कम नहीं होने दिया। दिल्ली में जब मेरा कीमो चल रहा था, तब मैं कौन बनेगा करोड़पति में ऑडिशन देने कोलकाता गई थी।

लाइफस्टाइल में कोई अंतर नहीं आने दिया

कैंसर मालूम चलने के बाद मैं मेरी लाइफस्टाइल और वर्किंग में कोई अंतर नहीं आया। बस लाइफ थोड़ा बंध सी गई। बाहर का खाना, घूमना बंद हो गया। लेकिन मैंने एक्टिव होकर काम किया। कोविड-19 के पहले तक मैं ग्वालियर के आसपास गांव में महिलाओं को रोजगार दे रही थी। उनसे पुराने कपड़ों से मैं बैग सिलवाती और उसे शहर में सब्जी वालों को सेल करवाती। जो भी इंकम होता, वे उन तक पहुंचता। इससे मुझे बहुत खुशी मिल रही थी, लेकिन संक्रमण के कारण यह रोकना पड़ा।

चारों बेटियों का भविष्य बनाना अब मेरा सपना

जब मुझे कैंसर के बारे में मालूम चला, तो मैं शॉक्ड हुआ, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। चेकअप कराने में बाद ऑपरेशन कराया। पैसे का इंतजाम नहीं था। किसी तरह किया। प्राइवेट कीमो चला और अब मैं ठीक हूं। हर महीने इलाज चल रहा है। मैं बिजनेस करता हूं। मेरी चार बेटियां हैं। अब मेरा सपना उन बेटियों को काबिल बनाना है। उन्हीं के लिए मैं जी रहा हूं।

राजाराम परिहार, कैंसर सर्वाइवर