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भाजपा पार्षदों ने विधायक को दी चेतावनी, कहा अब बैठक ली तो करेंगे विरोध

महापौर के इस्तीफे के बाद से ही नगर निगम में उथल पुथल मची हुई है

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ग्वालियर। लोकसभा क्षेत्र ग्वालियर से सांसद बनने के बाद विवेक नारायण शेजवलकर ने महापौर पद छोड़ दिया था। शहर में महापौर के इस्तीफे के बाद से ही नगर निगम में उथल पुथल मची हुई है। बहुमत में होते हुए भी बीजेपी पार्षदों की सुनवाई नहीं हो रही है। पार्षदों ने विधायकों पर भी निगम में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही बीजेपी पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि अब अगर विधायकों ने बैठक ली तो इसका विरोध करेंगे। वहीं कांग्रेस पार्षदों की मानें तो जनप्रतिनिधि पहले भी बैठक लिया करते थे यह कोई पहली दफा नहीं हुआ है।

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ग्वालियर पूर्व से विधायक मुन्नालाल गोयल ने नगर निगम अधिकारियों की 4 से अधिक बैठक बीते एक महीने में ली। इसमें उन्होंने क्षेत्र की समस्याएं एवं विकास के विभिन्न मुद्दे अधिकारियों के सामने रखे। इसके अलावा उन्होंने निगम अधिकारियों के साथ क्षेत्र का भ्रमण भी किया,लेकिन बीजेपी पार्षद इसको लेकर नाराज हैं। दक्षिण से विधायक प्रवीण पाठक ने भी निगम अधिकारियों की कई बैठक लीं। बीजेपी पार्षदों ने निर्णय लिया है कि अगर अब कोई विधायक बैठक लेगा तो सभी इसका विरोध करेंगे।

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कमिश्नर के सामने भी उठा मामला
विधानसभावार आयोजित पार्षदों की बैठक में भी बीजेपी पार्षदों ने इस मामले को कमिश्नर संदीप माकिन के सामने रखा था। पार्षदों ने कहा था कि अधिकारी विधायकों के साथ निरीक्षण में रहते हैं ऐसे में कार्य समय पर कैसे पूरे होंगे। इसके साथ ही पार्षदों ने निगम निधि से होने वाले कार्यों के उद्घाटन पार्षदों के बिना न करने की बात भी कही थी। इस पर कमिश्नर ने आगे से किसी भी उद्घाटन की जानकारी पार्षदों को भी देने की बात कही।

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ग्वालियर पूर्व के विधायक मुन्नालाल गोयल ने बताया कि सभी जनप्रतिनिधि का जनता के प्रति दायित्व होता है। पार्षद जनता की सही ढंग से सुनवाई नहीं करते हैं इसलिए जनता हमारे पास आती है। सीवर, पानी की समस्या को निगम को निपटाना चाहिए लेकिन लोगों की समस्या दूर नहीं होती है तो वह हमारे पास आती है। जनता की समस्या का समाधान कराना हमारी जिम्मेदारी है। इसमें हस्तक्षेप जैसे कोई बात नहीं है। दलीय राजनीति से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है।

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भाजपा पार्षद दिनेश दीक्षित ने बताया कि नगर निगम में विधायक अनावश्यक रूप से हस्तक्षेप कर रहे हैं। अगर विधायक को कोई सुझाव या शिकायत है या फिर कोई विकास कार्य कराना है तो इसके लिए निगम को पत्र लिख सकते हैं लेकिन बैठक लेने का अधिकार नहीं है। विधायक के बैठक लेने से समय की बर्बादी हो रही है और कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अगर विधायकों ने अब कोई बैठक ली तो बीजेपी इसका विराध करेगी।

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