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पुराने नोट बंद न होते तो हाथ न आता ये चोर, ये है माजरा

1000 व 500 के पुराने नोटों के बंद होने से सिर्फ आम जनता परेशान नहीं हो रही बल्कि अब तो चोरों की भी शामत आ गई है। अंचल के मुरैना जिले मेंं ऐसा ही वाकया हुआ है। 

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Shyamendra Parihar

Nov 14, 2016

effects after ban on note

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ग्वालियर। 1000 व 500 के पुराने नोटों के बंद होने से सिर्फ आम जनता परेशान नहीं हो रही बल्कि अब तो चोरों की भी शामत आ गई है। अंचल के मुरैना जिले मेंं ऐसा ही वाकया हुआ है। नोट बदलने जा रहे संदिग्ध युवक को पुलिस ने धर दबोचा। पुलिस ने युवक से चोरी की 15 बाइक बरामद कर ली हैं। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है।











टीआई अमित भदौरिया ने बताया कि शनिवार की शाम रामकुमार गुर्जर निवासी माधौपुरा बैंक में नोट बदलने जा रहा था। कस्बे में पुलिस की गाड़ी गश्त कर रही थी, तभी यह पुलिस को देखकर भागने लगा। पुलिस उसको पकड़ कर थाने ले गई।

वह चोरी की बाइक से शहर में घूम रहा था। पूछताछ के दौरान उसने 14 मोटरसाइकिल चोरी की और स्वीकार की। उनको उसके कब्जे से जब्त किया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपी ने कैलारस कस्बा सहित आसपास के क्षेत्रों से बाइक चोरी करना स्वीकार किया है।


पांच दिन से पूरा शहर दिखा कतारों में


पांच दिन से परेशान लोग बैंक खुलने वाले दिन से ही कतारों में हैं। रविवार का अवकाश होने के कारण बाजार बंद रहने से एमएस रोड पर दिन में जाम के हालात ज्यादा नहीं बने, लेकिन स्टेशन रोड स्थित एसबीआई के बाहर नोट बदलने वालों की भीड़ के कारण दिनभर जाम की स्थिति बनी रही। जीवाजीगंज में बैंक ऑफ इंडिया के सामने तो पांच बजे तक भीड़ सीमित हो गई, लेकिन जीवाजीगंज में देर शाम तक कतारें लगी रहीं।

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वहीं एमएस रोड पर आधा दर्जन बैंक शाखाएं होने पर यहां भी शाम तक भीड़ रही। हालांकि सड़क पर लगने वाले जाम को देखते हुए रविवार को लोगों को बैंकों बाहर दुकानों और घरों के सामने ही खड़ा किया गया, जिससे सड़क पर लोगों को ज्यादा परेशानी नहीं हुई।

सेंट्रल बैंक के बाहर नोट बदलवाने के लिए सुबह छह बजे से आए श्रीकृष्ण सविता का कहना था कि उनका नंबर आने तक बैंक के अधिकारी कहने लगे के कि कैश खत्म हो गया है, केवल खातों में राशि जमा होगी, जबकि वह तीन दिन से परेशान हैं। नोट बदलकर मिलने में आ रही परेशानी का असर किराना व सब्जी कारोबार पर भी दिख रहा है। अब राउंड फिगर बनाने के लिए या तो सामान महंगा दिया जा रहा है या ज्यादा मात्रा में दिया जा रहा है। वहीं जो सामान प्रिंट रेट से कम पर बेचा जा रहा था उसमें भी मौका देखकर दुकानदार पूरी दर वसूल रहे हैं।