
किताबों के शौकीनों ने घर पर बनाई मिनी लाइब्रेरी, कोरोना काल में तनाव से भी उबरे
किताब पढऩे की आदत विचारों को प्रभावशाली बनाने के साथ श्रेष्ठ चरित्र का भी निर्माण करती हैं। शहर में ऐसे कई लोग हैं, जो अपने बिजी शेड्यूल से भी समय निकालकर पढ़ाई करते हैं। किताबें पढ़ते-पढ़ते उन्होंने घर पर ही एक मिनी लाइब्रेरी तैयार कर ली है। उन्हें जब भी समय मिलता है, पढऩे बैठ जाते हैं। कोरोना काल में भी तनाव को दूर करने में इन किताबों का महत्वपूर्ण रोल रहा। आज बुक लवर्स डे है। हम आपको कुछ ऐसी ही पर्सनालिटी से परिचित करा रहे हैं।
घर पर बनाई लाइब्रेरी, ऑनलाइन बुक्स भी पसंद
अपने प्रोफेशन से जुड़े काम के सिलसिले में मुझे अधिकतर समय बाहर रहना पड़ता है। इसलिए ऑनलाइन बुक पढऩा प्रिफर करता हूं। इस समय मैं शिवा कुमार की 'द राइट चॉइसÓ बुक पढ़ रहा हूं। जब ग्वालियर रहता हूं, तो घर पर अपनी मिनी लाइब्रेरी में बैठकर तसल्ली से किताबें पढ़ता हूं। मेरे पास बुक्स का अच्छा कलेक्शन है। शटर्डे और संडे मेरा ऑफ रहता है। पूरा समय मेरा परिवार और किताबों के बीच ही बीतता है।
अविनाश मिश्रा, वाइस प्रेसीडेंट (एचआर), गोदरेज
कोरोना काल में अकेलापन महसूस नहीं होने दिया किताबों ने
हर महीने कम से कम चार टूर मेरे देशभर में ऐसे रहते थे, जहां मैं लोगों से मिलता और मंच संभालता था। कोरोना ने वह सब छीन लिया था। बहुत तनाव था, लेकिन मुझे पढऩे का शौक था। उसी शौक ने मुझे अकेलापन और उदास नहीं रहने दिया। उस समय मैं 7 से 8 घंटे किताबें पढ़ता था। खास तौर से लिट्रेचर। आज भी मैं डेढ़ से दो घंटे पढऩे में देता हूं।
मदन मोहन दानिश, शायर
नॉबेल, मैनेजमेंट और सक्सेस स्टोरी पढऩे में इंट्रेस्ट
मुझे किताबें पढऩे का शौक बचपन से था। कॉलेज टाइम में मैं अपने कोर्स से अलग किताबें भी पढ़ता था। वह शौक आज भी है। रोजाना डेढ़ से दो घंटे का समय पढऩे के लिए निकालता हूं। कोरोना काल में तनावमुक्त रखने और अपने आपको इंगेज रखने में कारगर रहीं। मैंने उस दौरान 5 से 6 घंटे किताबें पढ़ीं। मेरी लाइब्रेरी में नॉबेल, मैनेजमेंट और सक्सेस स्टोरी से जुड़ी किताबें हैं।
जेपी शर्मा, एबीवी ट्रिपल आइटीएम
Published on:
09 Aug 2021 09:38 am
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