
जंगल के लिए मशहूर श्योपुर के मैदानी क्षेत्र में एक किलोमीटर के बाद ही मिल पाती है छांव
श्योपुर। 6608 वर्ग किलोमीटर के जिले में 3300 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है और इस वन क्षेत्र में 16 प्रतिशत से अधिक कमी आई है। जबकि 3300 वर्ग किलोमीटर मैदानी क्षेत्र में से अधिकतर बड़े पेड़ काटे जा चुके हैं। उन्नत खेती के लिए प्रसिद्धि पा रहे बड़ौदा रोड, ढोढर रोड और पाली रोड के आसपास बसे करीब 200 गांवों के खेतों पर अब एक-एक किलोमीटर तक पेड़ नहीं दिखते। पुराने पेड़ों को इसलिए काट दिया गया क्योंकि लोगों की यह मानसिकता है कि खेत की मेढ़ पर खड़ा पेड़ जितनी जगह घेरेगा उतनी जगह में फसल नही होगी। परिणाम यह है कि गर्मी में छांव की तलाश में लोगों को मशक्कत करनी पड़ती है। मैदानी क्षेत्रों में पेड़ों की कमी से क्षेत्रीय तापमान में भी करीब दो डिग्री तक बढ़ोतरी हुई है।
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2009 में हरियाली महोत्सव अभियान शुरू किया था।। इस अभियान के बाद से लेकर अभी तक पूरे जिले में लगभग 6 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। पौधे लगाने पर ग्रामीण क्षेत्र की पंचायतों ने 10 वर्ष में 5 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर दिए। करोड़ों रुपए की लागत से लगाए गए यह पौधे अगर बड़े पेड़ हो गए होते तो जिले के मैदानी क्षेत्रफल के हिसाब से प्रत्येक एक हजार मीटर में 15 बड़े पेड़ होने चाहिए थे, लेकिन स्थिति इसके उलट है। गर्मी में तेज धूप होने पर लोगों को छांव नहीं मिलती।
नहीं दिखते विलेज फॉरेस्ट
विजयपुर
-कराहल की ग्राम पंचायतें पहले से ही जंगल क्षेत्र से सटी हैं।
-इसके बावजूद मानव निर्मित वन अभी तक विकसित नहीं कर पाए हंै।
-विजयपुर क्षेत्र की पंचायतों में सघन वन नजर नहीं आते।
श्योपुर
-श्योपुर की पंचायतों में अमरूद के बगीचे लगे हैं।
-बगीचों के अलावा खेतों पर सबसे ज्यादा कमी इसी क्षेत्र में है।
-बड़ौदा क्षेत्र में खेत खाली हैं। गांव के नजदीकी क्षेत्रों में अमरूद के बगीचे लगे हैं।
-पाली रोड के गांवों में सिंचाई की बेहतर सुविधा होने के बाद सघन वन विकसित नहीं हो सके।
नहीं दिखता पथ वृक्षारोपण
-नहरों के किनारे सिंचाई विभाग को पेड़ लगाने थे। पंचायतों को भी गांवों तक गई लिंक नहरों के आसपास पेड़ लगाने थे। वर्ष 2009 से वर्ष 2015 तक पथ वृक्षारोपण योजना के माध्यम से सबसे ज्यादा पैसा खर्च किया गया। इसके बावजूद नहरों के किनारे 10 वर्ष पुराने पेड़ बमुश्किल एक प्रतिशत हैं।
सड़कों के लिए काटे 20 हजार
-सामान्य विकास कार्य, सड़क निर्माण और ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर अभी तक जिले की सभी पंचायतों में लगभग 20 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं। अधिकतर पेड़ 40 वर्ष से अधिक आयु के ही थे। प्रत्येक पेड़ के बदले में कम से कम पांच इमारती पेड़ों के पौधे लगाए जाने थे, लेकिन अधिकतर जगहों पर पेड़ नहीं लगाए।
वर्सन
-जिले में हरियाली विकास के लिए हम लगातार काम कर रहे हैं। पिछले वर्ष 34 हजार पौधे लगाए गए थे। इस वर्ष नई प्लानिंग की गई है। इसके अंतर्गत किसानों को अपनी मेढ़ पर सहजन, जामुन,आम जैसे छांव और फल देने वाले पेड़ों के पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
शिवम वर्मा, कलेक्टर
Published on:
31 May 2023 10:38 pm
बड़ी खबरें
View Allग्वालियर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
