
भारतीय रेलवे
ग्वालियर . भारतीय रेलवे का एक नया अजब- गजब चेहरा सामने आया है। जहां यात्रियों को ट्रेन में बैठाए बिना ही रेलवे ने ग्वालियर से ही दिसंबर महीने में पांच लाख 19740 रुपए की कमाई कर ली। यह कमाई किसी अतिरिक्त सुविधा से नहीं, बल्कि कैंसिल टिकटों पर काटे गए चार्ज से हुई है। सर्दी के दिनों में बच्चों की छुट्टी के चलते हर कोई बाहर घूमने का प्रोग्राम बनाकर जाता है। इससे ट्रेनों में यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है। हर यात्री अपने हिसाब से स्लीपर और एसी कोच से अपना टिकट ले रहा है, लेकिन रेलवे क्षमता से अधिक वेटिंग टिकट बांट देता है। जिसके चलते इनका कंफर्म होना मुश्किल ही नहीं नामुकिन भी होता है। ऐसे में काफी संख्या में यात्री अपना टिकट यात्रा करने से पहले ही कैंसिल करा देता है। लेकिन इन कैंसिल टिकट के बावजूद भी रेलवे को काफी लाभ हो रहा है।
इन परिस्थिति में कटता है पैसा
ग्वालियर स्टेशन से हर दिन हजारों यात्री रिजर्वेशन कराते हैं। ट्रेन लेट होना, वेटिंग क्लीयर न होना या अचानक यात्रा रद्द होना यात्रियों की मजबूरी बन जाती है। ऐसे में यात्री टिकट कैंसिल कराते है, लेकिन रेलवे हर कैंसिल टिकट पर तय शुल्क काट लेता है। इसमें चाहे यात्री ने सफर किया हो या नहीं, पैसा कटना तय है। इससे रेलवे की जेब भर जाती है।
ऐसे समझें कैसे कटता है पैसा
अगर आपका वेटिंग टिकट है तो ट्रेन के आधे घंटे पहले तक स्लीपर क्लास के यात्री अगर टिकट कैंसिल कराने जाते है तो प्रति यात्री उन्हें 60 रुपए और एसी टिकट धारियों को प्रति यात्री 65 रुपए काटकर बाकी के पैसे वापस दिए जाते हैं। वहीं कंफर्म वाले यात्री अगर ट्रेन चलने से 48 घंटे पहले टिकट कैंसिल कराते हैं तो स्लीपर में 120, थर्ड एसी में 195, सेकंड एसी में 210 और फस्ट एसी में 240 रुपए कटते हैं, लेकिन हर हाल में मुनाफा तो रेलवे का ही होता है, लेकिन नुकसान यात्रियों को उठाना पड़ता है।
दिसंबर महीने
इतनी आय हुई
28676 : यात्री-
20430 : फॉर्म-
3897 : कैंसिल यात्री
519740 : कैंसिल का पैसा
इनका कहना है
रेलवे के नियमानुसार यात्री टिकट को कैंसिल करा सकता है। उसी के आधार पर कुछ रिफंड रेलवे काटता है।
मनोज कुमार सिंह, पीआरओ झांसी मंडल
Published on:
16 Jan 2026 06:00 pm

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