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नर्सिंग कॉलेज में मान्यता का खेल- सीबीआइ ने 30 कॉलेजों की सीलबंद लिफाफे में पेश की रिपोर्ट

- सीबीआइ बोली: नर्सिंग ट्रेनिंग देने वाले अस्पताल में छात्रों का रिकॉर्ड नहीं, हाईकोर्ट ने कहा, ट्रेनिंग सर्टिफिकेट बेच रहे हैं क्या? - कोर्ट का सीबीआइ को आदेश-अस्पतालों से एफिडेविट लें

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ग्वालियर। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में शुक्रवार को सीबीआइ ने 30 नर्सिंग कॉलेज की मान्यता संबंधित जांच रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश की। इसमें 50 फीसदी सरकारी नर्सिंग कॉलेज ऐसे हैं जो 2018 की मान्यता नियमों की शर्तों को पूरा नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा, यह आंकड़े शॉकिंग हैं। एडवोकेट जनरल ने जो आंकड़े पेश किए थे, वह जानकारी गलत थी। कोर्ट ने सीबीआइ को बाकी 310 नर्सिंग कॉलेजों की जांच जारी रखने को कहा है। अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

सीबीआइ ने कहा- पते पर नहीं था कॉलेज
सीबीआइ ने बताया, अब तक 54 नर्सिंग कॉलेजों की जांच की गई है। इसकी रिपोर्ट पेश कर दी है। रिपोर्ट में बताया कि जांच में एक नर्सिंग कॉलेज मात्र 1800 वर्गफीट क्षेत्र में चलता मिला। लैब नहीं थी।

लाइब्रेरी के नाम सिर्फ 20 किताबें रखी थीं। नवोदय नर्सिंग कॉलेज भोपाल का जो पता लिखा था, उस पर कॉलेज नहीं मिला। नर्सिंग छात्रों ने जिन अस्पतालों में ट्रेनिंग कोर्स पूरा किया, उन अस्पतालों के पास भी छात्रों का रिकॉर्ड नहीं था।

कोर्ट सख्त, पूछा-क्या छात्र फुटबॉल खेलकर चले जाते हैं
हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा, यह बड़ा घोटाला है। ट्रेनिंग के नाम पर क्या अस्पताल प्रबंधन सर्टिफिकेट बेच रहे हैं? कोर्स के दौरान छात्र ट्रेनिंग करने जाते है या फिर फुटबॉल खेलकर चले जाते हैं। कोर्ट ने सीबीआइ के उपपुलिस अधीक्षक दीपक पुरोहित को आदेश दिया कि जिन अस्पतालों में छात्रों ने ट्रेनिंग कोर्स किया, उन अस्पताल प्रबंधन से एफिडेविट पर लिखकर लें कि उनके पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। हाईकोर्ट ने प्रदेश के डीजीपी को निर्देश दिए कि सीबीआइ टीम को जांच के दौरान सुरक्षा के लिए पुलिस बल भी उपलब्ध कराएं।

प्वॉइंटर
- 33% नर्सिंग कॉलेज 10 साल से और उससे अधिक समय से चल रहे
- 67% नर्सिंग कॉलेज पांच साल और उससे अधिक समय से चल रहे
- 44% नर्सिंग कॉलेज पांच साल और उससे कम समय से चल रहे

अभी जारी हो रही मान्यता
मेडिकल यूनिवर्सिटी अब भी नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता दे रही है। इसके खिलाफ भी अधिवक्ता जितेन्द्र शर्मा ने आवेदन कोर्ट में पेश किया है। इस पर 27 जुलाई को सुनवाई होगी। आवेदन में कहा है, मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलसचिव और मप्र मेडिकल काउंसिल मिलकर कॉलेजों को मान्यता जारी कर रही है। यह गलत है।

ये है मामला
मप्र में 28 फरवरी 2023 से नर्सिंग परीक्षाएं शुरू होने वाली थी, लेकिन परीक्षा से ठीक 24 घंटे पहले हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। याचिकाकर्ता दिलीप कुमार शर्मा ने जनहित याचिका लगाई। इसमें नर्सिंग कॉलेजों को गलत तरीके से मान्यता देने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने बीएससी नर्सिंग, बीएससी पोस्ट बेसिक, एमएससी नर्सिंग परीक्षा पर रोक लगा दी थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि नर्सिंग कॉलेजों में पुराने शिक्षण सत्र की मान्यता गलत तरीके से दी गई है।