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सरकारी वकील को ईआरपी का पता न होना दुर्भाग्यपूर्ण, इन्हें हाईकोर्ट की वेबसाइट भी खोलना नहीं आता

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकीलों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण और चौंकाने वाला है कि राज्य की ओर से पेश हुए सरकारी वकील को हाईकोर्ट की वेबसाइट और ईआरपी सिस्टम की जानकारी तक […]

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हाईकोर्ट की एकल पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकीलों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण और चौंकाने वाला है कि राज्य की ओर से पेश हुए सरकारी वकील को हाईकोर्ट की वेबसाइट और ईआरपी सिस्टम की जानकारी तक नहीं है।

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया मध्यप्रदेश राज्य एवं अन्य बनाम रामदयाल एवं अन्य की सुनवाई के दौरान की। कोर्ट के समक्ष यह स्थिति तब सामने आई, जब राज्य की ओर से उपस्थित वकील को 21 जनवरी 2026 को पारित आदेश की जानकारी नहीं थी। कोर्ट ने जब ईआरपी खोलने को कहा गया, तो वकील ने स्वीकार किया कि उन्हें हाईकोर्ट की वेबसाइट खोलना तक नहीं आता है। न्यायालय ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाला वकील यदि अब तक एक बार भी कोर्ट की वेबसाइट और ईआरपी प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं करता, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। अदालत ने अतिरिक्त महाधिवक्ता को निर्देश दिए कि वे इस मामले को गंभीरता से लें और सरकारी वकीलों को हाईकोर्ट की वेबसाइट एवं ईआरपी प्लेटफॉर्म के उपयोग का प्रशिक्षण दिलाएं। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि अतिरिक्त महाधिवक्ता कार्यालय द्वारा एक कार्यशाला आयोजित की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। साथ ही, इस आदेश की प्रति महाधिवक्ता को आवश्यक जानकारी और अनुपालन के लिए भेजने के निर्देश दिए गए। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने अनुपालन रिपोर्ट देखने के बाद यह स्वीकार किया कि जिस फाइल के आधार पर राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ने यह निष्कर्ष निकाला था कि एक सेवानिवृत्त कर्मचारी मामले में विलंब का दोषी है, वह मूल फाइल न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई। इस पर न्यायालय ने मूल फाइल प्रस्तुत करने के लिए एक दिन का समय प्रदान करते हुए मामले की अगली सुनवाई 23 जनवरी को नियत की है।