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छह माह में तैयार होती है चंदेरी साड़ी

साड़ियों को तैयार करने में वर्तमान समय में टेक्नोलॉजी का यूज कर अधिक प्रोडक्टिविटी की जा रही है, लेकिन चंदेरी आज भी हथकरघे में ही बुनी जा रही है। एक साड़ी को तैयार करने में आज भी छह माह का समय लगता है।

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छह माह में तैयार होती है चंदेरी साड़ी

छह माह में तैयार होती है चंदेरी साड़ी

ग्वालियर. साड़ियों को तैयार करने में वर्तमान समय में टेक्नोलॉजी का यूज कर अधिक प्रोडक्टिविटी की जा रही है, लेकिन चंदेरी आज भी हथकरघे में ही बुनी जा रही है। एक साड़ी को तैयार करने में आज भी छह माह का समय लगता है। इसीलिए कारीगर एक मीटर साड़ी बनाने के बाद काला टीका लगाते हैं। इसमें शिल्पियों द्वारा नई-नई डिजाइन इजाद की जा रही हैं। फिर चाहे वह हेरिटेज उकेरना हो या फिर किसी कपल का फोटो ही क्यों न बनाना है। कुछ ऐसी साड़ियों की वैरायटी मेला ग्राउंड स्थित शिल्प बाजार में देखने को मिल रही है। यह मेला हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम की ओर से मप्र शासन ग्रामोद्योग विभाग के प्रायोजन में मेला ग्राउंड में आयोजित किया जा रहा है।

मेटल आयटम्स आकर्षण का केन्द्र

दीप मेला में परचेजिंग करने के लिए बुधवार को भी काफी संख्या में लोग पहुंचे। ग्वालियराइट्स ने चंदेरी साड़ियां, उज्जैन का बटीक प्रिंट, धार का बाग प्रिंट साड़ी को पंसद किया। इसके साथ ही मेटल आयटम्स भी खास आकर्षण का केन्द्र रहे। दिवाली में पूजा घर को सजाने के लिए मेटल कलेक्शन को काफी पसंद किया गया। मेले में विभिन्न प्रदेशों के 51 शिल्पी भाग ले रहे हैं। मेले में अमेरिकन डायमंड के लॉक वाले ब्रेसलेट कम दामों में उपलब्ध हैं। इसके साथ रियल स्टोन की माला, पर्ल्स के ईयररिंग, लांग मल्टीकलर हार, मल्टीलेयर नेकलैस, ब्लैक थ्रेड नैकलेस के साथ खूबसूरत रिंग बहुत पसंद की जा रही हैं।