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रात के अंधेरे में गायब हो रहा चीता, सैटेलाइट से लोकेशन ट्रेस कर पहुंच रही वन विभाग की टीम

ग्वालियर के आसपास के जंगलों में इन दिनों एक रहस्यमयी मेहमान की मौजूदगी ने वन विभाग से लेकर ग्रामीणों तक की धडकऩें बढ़ा दी हैं।
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ग्वालियर के आसपास के जंगलों में इन दिनों एक रहस्यमयी मेहमान की मौजूदगी ने वन विभाग से लेकर ग्रामीणों तक की धडकऩें बढ़ा दी हैं।

ग्वालियर के आसपास के जंगलों में इन दिनों एक रहस्यमयी मेहमान की मौजूदगी ने वन विभाग से लेकर ग्रामीणों तक की धडकऩें बढ़ा दी हैं।

ग्वालियर के आसपास के जंगलों में इन दिनों एक रहस्यमयी मेहमान की मौजूदगी ने वन विभाग से लेकर ग्रामीणों तक की धडकऩें बढ़ा दी हैं। यह मेहमान है तेज रफ्तार और शिकार के लिए मशहूर चीता, जो बीते करीब दो महीनों से ग्वालियर वन मंडल के घाटीगांव क्षेत्र के लखनपुरा और तिलावली के जंगलों में घूम रहा है। दिन में आंखों से ओझल रहने वाला यह चीता रात होते ही अचानक सक्रिय हो जाता है और लंबी दूरी तय कर जंगलों में गायब हो जाता है। रात के अंधेरे में चीते का इस तरह अचानक गायब हो जाना किसी रहस्य से कम नहीं, लेकिन आधुनिक तकनीक ने इस रहस्य से पर्दा हटा दिया है। चीते के गले में लगे सैटेलाइट कॉलर के जरिए वन विभाग उसकी हर गतिविधि पर पल-पल नजर बनाए हुए है। जैसे ही चीता अपनी लोकेशन बदलता है, कंट्रोल रूम में सिग्नल मिल जाता है और वन विभाग की टीम तुरंत अलर्ट हो जाती है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह चीता दिन के समय घने जंगलों और झाडिय़ों में छिपा रहता है। सूरज ढलते ही वह अपने स्वभाव के अनुसार सक्रिय हो जाता है और कई किलोमीटर तक का सफर तय कर लेता है। उसकी यह रात की गतिविधि न केवल वन विभाग के लिए चुनौती है, बल्कि आसपास बसे गांवों के लोगों के लिए भी चिंता का विषय बन गई है।
चीते के मवूेंट पर दिन-रात रहती है नजर
वन विभाग की विशेष टीमें लगातार क्षेत्र में गश्त कर रही हैं। कैमरे, सैटेलाइट ट्रैकिंग और फील्ड स्टाफ की मदद से चीते की मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। जैसे ही चीता किसी रिहायशी इलाके की ओर बढ़ता है, टीम तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाल लेती है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे रात के समय जंगल की ओर न जाएं, मवेशियों को खुले में न छोड़ें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें।