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केमिकल और रंग से बने चने बिगाड़ सकते हैं आपकी सेहत

यदि आप चने खाने के शौकीन हैं तो जरा संभलकर इनका इस्तेमाल करें, क्योंकि बाजार में बिकने वाले चनों को जिस रंग से रंगा जा रहा है वह केमिकल और हानिकारक रंग है। वैसे तो चनों पर रंग चढ़ाने की जरूरत ही नहीं है

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केमिकल और रंग से बने चने बिगाड़ सकते हैं आपकी सेहत

ग्वालियर. यदि आप चने खाने के शौकीन हैं तो जरा संभलकर इनका इस्तेमाल करें, क्योंकि बाजार में बिकने वाले चनों को जिस रंग से रंगा जा रहा है वह केमिकल और हानिकारक रंग है। वैसे तो चनों पर रंग चढ़ाने की जरूरत ही नहीं है, लेकिन लोगों को आकर्षित करने के लिए पीला रंग चढ़ाकर बेचा जा रहा है। हानिकारक रंग से रंगे चने भगवान के भोग से लेकर दूसरी चीजों में भी जमकर इस्तेमाल हो रहे हैं, लेकिन खाद्य एवं औषधि विभाग की इस पर नजर नहीं है। पत्रिका ने शनिवार को छत्री मंडी के पीछे बनी अनाज मंडी में जाकर देखा, जहां चनों को भूंजा जाता है, वहां चनों पर रंग चढ़ाने का काम बेधडक़ किया जा रहा है। ये रंग सेहत के लिए काफी हानिकारक हैं और लीवर एवं किडनी के साथ अन्य अंगों पर बुरा असर डाल सकते हैं।


ऐसे कर रहे तैयार
चनों को करीब 20 से 25 मिनट तक भाड़ (भट्टी) में भूंजा जाता है। भूंजने के बाद उन्हें केमिकल और हानिकारक रंग से रंगा जाता है, इससे उन पर पीले रंग की चमक आ जाती है।


सत्तू भी असली नहीं
गर्मी के दिनों में सत्तू घोलकर पीने से राहत मिलती है। सत्तू चने, गेहूं और जौ मिलाकर तैयार किया जाता है। सत्तू भी इन तीनों से न बनाते हुए केवल और जौ और गेहूं को मिलाकर बनाया जा रहा है। इसमें भी पीलापन लाने के लिए पीले रंग का इस्तेमाल किया जा रहा है।


हर रोज 20 क्विंटल से अधिक की खपत
शहर में हर रोज चने की 20 क्विंटल से अधिक की खपत है। बताया जाता है कि सबसे अधिक मंदिरों में भगवान को लगने वाले भोग के लिए इलायची दाने के साथ बिकते हैं। ठेलों के साथ किराना दुकानों पर भी चने की बिक्री होती है। कई लोग सब्जी की ग्रेवी में भी चनों का उपयोग करते हैं। बाजार में बिकने वाले ये हानिकारक चने 80 से 100 रुपए प्रति किलो बेचे जा रहे हैं। रंगे हुए चने खाने पर इनमें कुछ कड़वाहट महसूस होती है।

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