क्या होती है कैंसर में दी जाने वाली कीमोथैरेपी?, जानिये यहां
कीमोथेरेपी एक ऐसा औषधीय उपचार है, जो कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए दिया जाता है। कीमोथेरेपी दो शब्दों से मिलकर बना है - कैमिकल या रसायन और थेरेपी या उपचार।
ग्वालियर। देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। भले ही कैंसर होने के कई कारण लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन इसे कंट्रोल करने के लिए अधिकतर मामलों में कीमोथेरेपी को ही सबसे उपयुक्त माना जाता है।
डॉक्टरों के मुताबिक कीमोथेरेपी एक ऐसा औषधीय उपचार है, जो कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए दिया जाता है। कीमोथेरेपी दो शब्दों से मिलकर बना है - कैमिकल या रसायन और थेरेपी या उपचार।
किसी शख्स को किस प्रकार की कीमोथेरेपी दी जाए, ये इस बात पर निर्भर करता हे कि उसे किस प्रकार का कैंसर है। कीमोथेरेपी अकेले भी दी जा सकती है या सर्जरी और रेडियोथेरेपी के साथ भी।
कीमोथेरेपी वैसे तो कई तरीकों से दी जा सकती हैं, लेकिन इसे देने की तीन सबसे आम विधियां हैं।
1. ड्रिप की सहायता से नस में एक सुई के द्वारा भी ये थेरेपी दी जाती है।
2. एक गोली या द्रव(लिक्विड) के रूप में मुंह के द्वारा भी कीमोथेरेपी दी जाती है।
3. एक छोटे से पम्प के जरिए, जो एक विशेष लाइन द्वारा, जिसे पीआईसीसी या हिकमैन लाइन कहते हैं, कीमोथेरेपी शरीर के अन्दर पहुंचाता है (यह पम्प कमर में बंधे एक छोटे से बैग में रखा होता है)।
कैंसर को लेकर लोगों में संदेह काफी ज्यादा हैं। अस्सी प्रतिशत लोग यह अनुमान लगा लेते हैं कि उन्हें शरीर के किसी भाग में कैंसर है, लेकिन महिलाओं के साथ खासकर यह समस्या होती है कि वे किसी को इस बारे में बता नहीं पाती हैं। जानकारों के मुताबिक शरीर में कहीं गठान हो तो मरीज चिकित्सक के पास तब पहुंचता है जब कैंसर अंतिम दौर में हो। ज्यादातर लोग यह भी मानते हैं कि कैंसर का इलाज नहीं है, लेकिन नई तकनीकों के कारण बढ़े हुए कैंसर का इलाज भी संभव है।
शरीर के किसी भी भाग पर ऊतकों में असमान्य रूप से गठान उभरना कैंसर हो सकता है। इस बीमारी को अलग-अलग श्रेणी में रखा जा सकता है। ये श्रेणियां शरीर के भाग के अनुसार निर्भर करती हैं।
हड्डी में होने वाली गठान को बोन ट्यूमर कहते हैं। इसका इलाज उस हड्डी को शरीर से अलग कर देना ही है। सॉफ्ट टिश्यू यानी ऊतकों में होने वाला कैंसर है। इसमें रेडिएशन देकर कैंसर के प्रभाव को कम किया जाता है, इसके अलावा इस बीमारी का तीसरा प्रकार रक्त कैंसर होता है।
यह हैं सामान्य लक्षण
किसी अंग पर गठान बन जाना, अचानक शरीर के किसी भाग से रक्त जाना, चमड़ी में बदलाव महूसस होना, भूख कम लगना, खांसी ज्यादा आना, खांसी में खून निकलना।
शरीर के किसी भी भाग पर ऊतकों में असमान्य रूप से गठान उभरना कैंसर हो सकता है। इस बीमारी को अलग-अलग श्रेणी में रखा जा सकता है। ये श्रेणियां शरीर के भाग के अनुसार निर्भर करती हैं।
सबसे पहले कैंसर को ज्ञात करने के लिए बायोप्सी की जाती है। इसमें कैंसर का छोटा भाग निकाला जाता है और फिर उसका परीक्षण किया जाता है। इसे बायोप्सी कहते हैं। अगर गठान छोटी हो तो पूरी गठान निकाल ली जाती है और अगर गठान बड़ी हो तो कुछ हिस्सा ही परीक्षण के लिए निकाला जाता है। कैंसर का पता लगाने के बाद जो इलाज किया जाता है, उसमें कीमोथैरेपी प्रमुख है।
कीमोथैरेपी कैंसर के असर को कम करने के लिए दी जाती है। उदाहरण के लिए अगर कैंसर चौथी स्टेज पर हो तो यह थैरेपी इसे दूसरी स्टेज पर ले आती है। यह हर तरह के कैंसर में नहीं दी जा सकती। इसी तरह रेडियोथैरेपी शरीर में कैंसर के ऊतकों को कम करने के लिए दी जाती है।