
गेम एडिक्शन का शिकार हो रहे बच्चे, एक साल में बढ़ गए 60 परसेंट केस
पढ़ते-पढ़ते ऑनलाइन गेम्स तक पहुंच रहे बच्चे, पैरेंट्स को रखना होगा खास ख्याल
ग्वालियर.
महज छह साल का राघव (परिवर्तित नाम) पिछले तीन महीने से मोबाइल गेम खेल रहा है। एक दिन मां ने उसे डांट लगाई, तो उसने अपने आपको कमरे में बंद कर लिया और सामान फेंकने लगा। दरवाजा तब खोला, जब उसने मां से यह कहला लिया कि उसे गेम खेलने को मिलेगा। यह वाकया पूरे परिवार के लिए अचंभित करने वाला था। उन्होंने साइकोलॉजिस्ट से संपर्क किया, तो पाया कि राघव गेम एडिक्शन की शिकार है। कुछ दिन की थेरेपी के बाद अब उसके व्यवहार में कुछ सुधार आया है और चिड़चिड़ापन भी कम हुआ है। यह केवल राघव का मामला नहीं है। शहर में ऐसा व्यवहार करने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
पीएम मोदी ने किया ऑनलाइन गेम्स पर ट्वीट
पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ऑनलाइन गेम्स के खतरों को लेकर ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि जितने भी ऑनलाइन या डिजिटल गेम्स मार्केट में हैं, उनमें से अधिकतर का कॉन्सेप्ट भारतीय नहीं है। इनमें से अधिकांश गेम्स के कॉन्सेप्ट या तो वॉयलेंस को प्रमोट करते हैं या मेंटल स्ट्रेस का कारण बनते हैं।
पढ़ते-पढ़ते खेलने लग जाते हैं गेम
चिकित्सकों के अनुसार कोरोना काल में जब ऑनलाइन क्लास का समय चल रहा है, तो कई बार बच्चे पढ़ाई करते-करते मोबाइल में गेम खेलने लग जाते हैं और खेलते-खेलते यह बच्चे कुछ हिंसात्मक वीडियो देखने लगते हैं या एडल्ट गेम खेलने लगते हैं, जिसका उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
नशे जितना खतरनाक है गेम एडिक्शन
जयारोग्य हॉस्पिटल के सीनियर साइकोलॉजिस्ट डॉ. कमलेश उदैनिया ने बताया कि गेम एडिक्शन के शिकार बच्चे पिछले एक साल में 60 परसेंट तक बढ़ गए हैं। पहले जहां महीने में ऐसे दो केस आते थे, अब चार से पांच मामले आ रहे हैं। लोग ऑनलाइन भी एडवाइज ले रहे हैं। दरअसल बच्चे जब किसी ऑनलाइन गेम में जीतते हैं, तो उनके अंदर खेल को खेलने की इच्छा बढ़ती है और वह बार-बार वह गेम खेलना शुरू कर देते हैं। धीरे-धीरे यह लत लग जाती है और यह इतनी ही खतरनाक है, जितनी किसी व्यक्ति को नशे की लत लगना। गेम एडिक्शन के कारण बच्चों में चिड़चिड़ापन, जिद्दी और उग्र स्वभाव देखने को मिल रहा है। शारीरिक और मानसिक बीमारियां भी पैदा हो रही हैं। इसके लिए पैरेंट्स को बच्चों पर ध्यान देने की जरूरत है।
मोबाइल पर ऑनलाइन हिस्ट्री चेक करें पैरेंट्स
काउंसलर सीता पाणिग्रही के अनुसार बच्चों को कंट्रोल करने के लिए पैरेंट्स को नियमों को फॉलो करना जरूरी है। पैरेंट्स गलत भाषा के इस्तेमाल वाली वेबसीरीज या सीरियल देखते हैं, तो बच्चे वह भाषा या व्यवहार सीखेंगे ही। पहले हमें खुद अपने पर रिस्ट्रक्शन लगाना जरूरी है। 3 साल की उम्र में भी बच्चों में एग्रेशन देखने को आ रहा है, ऐसे में यह पैरेंट्स की जिम्मेदारी बन जाती है कि वे उन पर नजर रखें और अपने व्यवहार को भी संतुलित करें। ऑनलाइन हिस्ट्री चेक करें, जिससे पता चले कि बच्चे किस साइड पर ज्यादा गए।
पैरेंट्स ये करें
- बच्चों के सामने खुद ज्यादा मोबाइल न चलाएं, न ही कोई एडल्ट गेम खेलें।
- अगर उन्हें कुछ देर के लिए मोबाइल दे रहे हैं, तो अपने सामने ही गेम खेलने को कहें।
- बच्चों को टाइम दें और उन्हें अपने साथ घर के छोटे-छोटे काम जैसे बुक्स, टॉयज रखना सिखाएं।
- बच्चों को ऑनलाइन गेम का ऑप्शन दें, उन्हें पुराने गेम खिलाएं। ड्रॉइंग, डांस आदि करवाएं।
- अपना समय उन्हें जरूर दें, उनसे बाते करें और उनके मन में क्या चल रहा है, जानने की कोशिश करें।
फैक्ट फाइल
- 2 गुना बढ़ी मनोवैज्ञानिक परेशानी से ग्रसित बच्चों की संख्या
- 20 परसेंट अभिभावक कर रहे बच्चों में सिरदर्द और आंखों की परेशानी की शिकायत
- 4 साल जैसी छोटी उम्र के बच्चे भी हो रहे गेमिंग एडिक्शन के शिकार
- 4 गुना बढ़ी ऑनलाइन क्लास के दौरान गेम खेलने वाले बच्चों की संख्या
Published on:
25 Jun 2021 10:53 am
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