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छोटे देशों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा चीन

आइटीएम यूनिवर्सिटी में वैश्विक व्यवस्था पर डिस्कशन

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छोटे देशों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा चीन

छोटे देशों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा चीन

आइटीएम यूनिवर्सिटी में वैश्विक व्यवस्था पर डिस्कशन

ग्वालियर.

उद्घाटन भाषण आइटीएम के वाइस चांसलर डॉ एसएस भाकर ने दिया

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पूरी दुनिया दो खेमों में बंट गई थी। कुछ रूस के साथ तो कुछ अमेरिका के साथ। गुटनिरपेक्ष रहना मुश्किल था। भारत गुटनिरपेक्ष रहा। कुछ समय के लिए रूस के विघटन के बाद जब तक चीन दृश्य पर नहीं आया, तब तक संयुक्त राज्य अमेरिका प्रमुख शक्ति बन गया। अब चीन नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान जैसे छोटे देशों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। चीन की नीति इन देशों में बड़ी परियोजनाएं शुरू करने की है वो भी तब जब वे इन परियोजनाओं को हासिल करने के लिए भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं। कुछ ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे थे माल्टा, जॉर्डन और लीबिया में राजूदत रह चुके अनिल त्रिगुणायत। वे आइटीएम यूनिवर्सिटी के 12वें विज्डम लेक्चर सीरिज में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे। उद्घाटन भाषण आइटीएम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ एसएस भाकर ने दिया।

वर्तमान संदर्भ में भारत की विदेश नीति
अनिल त्रिगुणायत नेे वैष्विक व्यवस्था और वर्तमान संदर्भ में भारत की विदेश नीति की चुनौतियों पर अपना व्याख्यान दिया। इसके अलावा उन्होंने विभिन्न कॉरीडोर्स के गणन, परिणामों और क्वाड, सार्क देशों के साथ संबंध और चीन और पाकिस्तान के साथ सीमा मुद्दों के बारे में भी बताया। कार्यक्रम की शुरुआत में स्वागत भाषण डीन इंडस्ट्री इंटरेक्शन एंड कंसल्टेंसी प्रोफेसर डॉ रतन कुमार जैन ने दिया। आखिर में डीन इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एंड प्रोजेक्ट्स डॉ योगेश चंद्र गोस्वामी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।