
शहर सहित जिले में 100 चिटफंड कंपनियों ने कारोबार किया था। हजारों लोगों के करोड़ों रुपए जमा कराए, लेकिन जब देने की बारी आई तो कंपनियां चंपत हो गई। अब निवेशक अपने रुपए लेने के लिए भटक रहे हैं। इन कंपनियों की जिले में संपत्ति नहीं है, खाते भी खाली पड़े हैं। ऐसी स्थिति में रुपए लौटना संभव नहीं है। निवेशक अपने रुपए वापस लेने के लिए जनसुनवाई में शिकायत करने पहुंचने लगे हैं। निवेशकों ने औसतन 20 हजार रुपए से अधिक की पॉलिसी ली है। परिवार डेयरी सहित अन्य कंपनियों के 60 हजार निवेशकों के आवेदन लंबित हैं, जिन्हें पैसा वापस लेना है। 11 हजार आवेदन विधानसभा चुनाव से पहले आए हैं।
जिले में चिटफंड कंपनियों ने किराए के मकान लेकर अपने ऑफिस खोले और एजेंटों के माध्यम से लोगों से कंपनी में निवेश कराया। एजेंटों ने अपने रिश्तेदारों व करीबियों से कंपनियों में निवेश कराया, लेकिन 2011 में चिटफंड कंपनियों के खिलाफ प्रशासन ने अभियान शुरू किया और उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज कर संपत्तियां कुर्क कर दी। साथ ही खाते सीज कर दिए, लेकिन कंपनियों ने जो निवेश कराया था, उतने रुपए खाते में नहीं थे, न संपत्ति शहर में है। इस कारण इनका पैसा लौटना संभव नहीं दिख रहा है। अपर कलेक्टर टीएन सिंह का कहना है कि शासन से दिशा निर्देश आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कंपनियों ने यह कारोबार दिखाया था
- चिटफंड कंपनियों ने अपने अल-अलग कारोबार दिखाए थे। जिसमें निवेशकों के पैसे से प्लॉट, टाउनशिप, खेती की जमीन खरीदना बताया।
- दूध का कारोबार बताकर पैसे निवेश कराए गए। डेयरी के नाम से काफी कंपनियां संचालित कीं।
- खेती के उत्पाद का कारोबार भी बताया। जैसे कि अनाज खरीदना बताया गया।
- कंपनियों ने निवेशकों को बताया कि निवेश से जो मुनाफा होगा, उसमें हिस्सा दिया जाएगा।
पीडि़तों ने संगठन भी बनाए हैं
चिटफंड कंपनियों में निवेश करने वाले निवेशकों ने संगठन भी बना लिए हैं। संगठन के बैनर तले अपना पैसा वापस लेने के लिए अभियान चला रहे हैं। जन सुनवाई सहित अन्य माध्यम से शिकायत कर रहे हैं।
- ग्वालियर में जिन कंपनियों के मुख्यालय थे, उनकी संपत्ति मौजूद है, जैसे कि परिवार डेयरी व केएमजे की संपत्तियां हैं।
Updated on:
16 Dec 2023 03:12 pm
Published on:
16 Dec 2023 02:38 pm
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