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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा वन आरक्षक की हत्या का मामला, शीर्ष अदालत ने दिखाई सख्ती

MP Forest Guard Murder Case: रेत माफिया पर सख्त नजर आया सुप्रीम कोर्ट, ग्वालियर के मुरैना में चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और वन आरक्षक की हत्या के मामले पर स्वत: लिया संज्ञान

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supreme court

MP Forest Guard Murder Case in supreme court(photo: X)

MP Forest Guard Murder Case in SC: रैना में चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और इससे बढ़ रही हिंसा को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट का सख्त रवैया नजर आया है। जस्टिस विक्रम नाथ व जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने वनरक्षक हरिकेश गुर्जर की ड्यूटी के दौरान ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या के मामले में अब स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट ने इस केस में 13 अप्रैल को सुनवाई की तारीथ तय की है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को चंबल सेंचुरी में अवैध रेत खनन से जुड़े मामले में एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) रूपाली सैमुअल ने फॉरेस्ट गार्ड की हत्या का मामला उठाया। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाने से उनका उद्देश्य था सुप्रीम कोर्ट का ध्यान आकर्षित करना। इस मामले को शीर्ष कोर्ट ने गंभीरता से लिया और त्वरित सुनवाई तय कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को लेकर स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि वह अवैध खनन को रोकने के लिए व्यापक और कड़े निर्देश जारी करेगा।

घटना के अगले दिन जागा प्रशासन

मुरैना में वन आरक्षक को ट्रैक्टर से कुचलने (MP Forest Guard Murder Case) की वारदात के अगले दिन प्रशासन हरकत में आया। 1.63 करोड़ रुपए की 8195 ट्रॉली अवैध रेत नष्ट कराई गई। संयुक्त टीम की दबिश से रेत माफिया भूमिगत हो गया।

बता दें कि घटना के बाद शहर के बैरियर चौराहे पर लगने वाली अवैध रेत मंडी गुरुवार को पूरी तरह सूनी रही। वन आरक्षक हरिकेश गुर्जर को शहीद का दर्जा दिलाने के लिए वन विभाग ने प्रशासन को पत्र भी लिखा है।

वन आरक्षक की हत्या का सफेदपोश कनेक्शन

दिमनी थाना क्षेत्र में वनरक्षक हरिकेश गुर्जर की ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर की गई हत्या (MP Forest Guard Murder Case) के मामले में सफेदपोश कनेक्शन सामने आया है। रेंजर के आवेदन पर पुलिस ने भाजपा नेता पवन तोमर और सोनू चौहान के खिलाफ हत्या और साजिश का मामला दर्ज किया है। लेकिन, इस सनसनीखेज वारदात के दो दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ आरोपियों तक नहीं पहुंच सके हैं। पुलिस दबिश का दावा कर रही है और आरोपी रसूख के दम पर पकड़ से दूर हैं। इस पूरे हत्याकांड में पुलिस और वन विभाग के बीच तालमेल की भारी कमी उजागर हुई है।

रेंजर ने नहीं दी कोई सूचना

दिमनी थाना प्रभारी का आरोप है कि घटना के बाद रेंजर ने उन्हें कोई सूचना नहीं दी। जब एक आम नागरिक ने फोन किया, तब पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक हत्यारा चालक ट्रैक्टर लेकर भाग चुका था। दूसरी ओर, अंबाह रेंजर वीर कुमार तिर्की का कहना है कि उन्होंने घटना के तुरंत बाद थाने फोन लगाया था, लेकिन सुबह का वक्त होने के कारण पुलिस ने फोन रिसीव ही नहीं किया। इस कॉल के विवाद के बीच रेत माफिया को भागने का पूरा मौका मिल गया।

आरोपियों की तलाश जारी

''अंबाह रेंजर ने हमें घटना के बाद सूचना नहीं दी। हमें जनता से फोन आया, तब हम पुलिस फोर्स लेकर पहुंचे। समय पर जानकारी मिलती, तो ट्रैक्टर और चालक मौके पर ही दबोच लिए जाते। हमने ट्रैक्टर जब्त कर लिया है, आरोपियों की तलाश जारी है।''

-जितेन्द्र दौहरे, थाना प्रभारी, दिमनी