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आचार संहिता लाई राहतों की मार, योजना के लाभ से लेकर कोई भी सरकारी काम, अब करना होगा इतना इंतेजार

लोकसभा रिजल्ट 2024 के बाद ही सामान्य हो सकेंगी सभी व्यवस्थाएं। न तो वृद्धा पेंशन खाते में आएगी और न ही कोई राहत स्वीकृत होगी।

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आचार संहिता लाई राहतों की मार, योजना के लाभ से लेकर कोई भी सरकारी काम, अब करना होगा इतना इंतेजार

ग्वालियर. लोकसभा चुनाव 2024 की आचार संहिता लगने के बाद शासन से लोगों को मिलने वाली राहतें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। पक्षकारों से न आवेदन लिए जा रहे हैं, न ही पुराने आवेदन स्वीकृत हो रहे हैं। लोगों को राहत के लिए अब दो महीने इंतजार करना होगा। लोकसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद जून में आचार संहिता की बंदिशें हटेंगी।


16 मार्च से आचार संहिता लागू होने के बाद जनसुनवाई बंद कर दी गई है। इसका आदेश शासन स्तर से जारी किया गया। जो कर्मचारी लोगों की सहायता की सेल की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, वो अब चुनाव में ड्यूटी कर रहे हैं। वहीं अब 50 हजार से अधिक नकद लेकर नहीं चल सकते हैं। अगर लेकर चल रहे हैं तो उसके दस्तावेज साथ लेकर चलें। अगर जांच में पकड़े गए तो पैसे तो जब्त होंगे ही साथ साथ न्यायिक कार्रवाई होगी वो अलग।

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विधवा, वृद्धा पेंशन के आवेदन लेना बंद हो गए हैं। यदि कोई हितग्राही आवेदन करना चाहता है तो पोर्टल पर आवेदन खुलेगा नहीं। इसके अलावा 60 साल की उम्र होने पर हर महीने लाड़ली बहना योजना से भी महिलाएं बाहर हो रही हैं। इन्हें वृद्धा पेंशन में आवेदन करना होता है। दो महीने तक पोर्टल खुलने का इंतजार करना पड़ेगा।

रेड क्रॉस से भी लोगों को राहत दी जाती है। जन सुनवाई सहित सीधे अधिकारियों के पास लोग राहत मांगने पहुंचते थे। जरूरत मंद को तत्काल दस हजार रुपए की राहत मिल जाती थी। रेड क्रॉस से भी राहत नहीं मिल सकती है।

सीएम स्वेच्छानुदान के आवेदन कलेक्ट्रेट में लिए जाते हैं। यह आवेदन संबंधित व्यक्ति की सहायता के लिए भोपाल भेज दिए जाते हैं। इस मद में वह लोग आवेदन करते हैं जो बीमारी से ग्रसित हैं और इलाज नहीं करा सकते हैं। आचार संहिता लगने के बाद आवेदन स्वीकार नहीं हो रहे हैं।

- जिले में 31 हजार 177 पिस्टल, पिस्तौल, बंदूक के लाइसेंस हैं। शस्त्र लाइसेंस धारियों को लाइसेंस का नवीनीकरण कराना होता है। अगर लाइसेंस नवीनीकरण की तारीख निकल गई तो संबंधित व्यक्ति को 2000 रुपए का जुर्माना भुगताना पड़ता है। आचार संहिता के चलते नवीनीकरण का काम भी बंद है।

- नामांतरण के केसों के निराकरण के लिए राजस्व महाभियान चलाया गया था, लेकिन ये काम ठप हो गया है। धीरे-धीरे पेंडेंसी भी बढ़ना शुरू हो गई है। लोगों को अपने नामांतरण के लिए परेशान होना पड़ रहा है। नामांतरण की शिकायतें सीएम हेल्पलाइन में आने लगी हैं।

- खेतों से फसल कटने के बाद सीमांकन शुरू होते हैं, लेकिन चुनाव के चलते इस बार सीमांकन भी नहीं हो सकेंगे। क्योंकि राजस्व अधिकारी चुनाव में व्यस्त हैं।

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