
देश और समाज को युवाओं से बहुत अपेक्षाएं, समाज की उन्नति में भी योगदान दें
ग्वालियर.
समाज और देश को युवाओं से बहुत अपेक्षाए हैं। कभी ऐसा कार्य मत करना, जिससे आपकी वजह से समाज व देश को नीचा देखना पड़े। कभी भारत मां पर लांछन मत लगने देना। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने युवाओं के लिए अनुकूल वातावरण बनाया है। युवा नौकर नहीं नौकरी देने वाले बने। उनके लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। यह बात मप्र के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने आइटीएम यूनिवर्सिटी के छठवें दीक्षांत समारोह में कही। समारोह दो सत्रों में बांटा गया, पहले सत्र में प्री-कन्वोकेशन सेरेमनी रखी गई। दूसरा सत्र कन्वोकेशन सेरेमनी का रहा, जिसमें मानद उपाधियां व डिग्रियां प्रदान की गईं। विशिष्ट अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव उपस्थित रहे। देश की 7 हस्तियों को मानद उपाधि से नवाजा गया, जिनमें से
आप भी डिग्री लेकर अब नए भविष्य की ओर बढ़ें
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा और दीक्षा ये दोनों महत्वपूर्ण हैं। ये दीक्षा का दीक्षांत समारोह है। शिक्षा एक जन्म के बाद माता-पिता से मिलती है, दूसरी शैक्षणिक संस्थान में। शिक्षा सिर्फ धन कमाने के लिए नहीं है, उससे हमने समाज को क्या दिया, यह सोचना जरूरी है। चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह ने देशप्रेम की शिक्षा के नए अध्याय दिए। महात्मा गांधी वकील थे, लेकिन शिक्षा के साथ पिटीशन लगाने का कार्य उनसे शुरू होता है। उन्होंने स्वयं से पहले देश के लिए सोचने की शिक्षा दी। ऐसे कई उदाहरण है इतिहास में, जो वर्तमान में आदर्श हैं। आप भी डिग्री लेकर अब नए भविष्य की ओर बढ़ें।
एनीमल ह्यूमन मिक्सिंग से बढ़ रही जूनोटिक डिसीज
वायरोलॉजिस्ट डॉ गगनदीप कंग ने कहा कि 30 वर्षो में हमने जितनी बीमारियां देख लीं उतनी 200 वर्षों में नहीं थी। कारण ट्रेवल, माइग्रेशन और एनीमल इंटरेक्शन बढऩा है। एनीमल ह्यूमन मिक्सिंग से जूनोटिक डिसीज बढ़ रही हैं। स्वाइन फ्लू भी एक ऐसा ही पेंडेमिक था और ऐसा ही एक और पेंडेमिक भविष्य में फिर देखने को मिल सकता है। हमें आगे के लिए तैयार रहना पड़ेगा। हमारे लिए गर्व की बात है कि जल्द ही वैक्सीन बना ली जो सिर्फ भारत ही नहीं अन्य देशों के भी कमा आ रही है। अक्सर 10 में से 1 वैक्सीन सफल होती है लेकिन हमारी 18 वैक्सीन सफल रहीं और सिर्फ 5 असफल। इसका कारण जो हमने इतने वर्षों से रिसर्च की वो इस समस्या के समाधान में इस्तेमाल की।
आजीवन छात्र बने रहें और नई चीजें सीखें
आइटीएम यूनिवर्सिटी की चांसलर रूचि सिंह चौहान ने कहा कि आप सभी ने यूनिवर्सिटी में अपनी शिक्षा पूर्ण कर डिग्री प्राप्त कर ली है, लेकिन आपको शिक्षा ग्रहण करना अनवरत जारी रखना होगा। आजीवन छात्र बने रहें। रोज नई चीजें सीखें, ये संभावनाओं का युग है। जितनी संभावनाएं वर्तमान में है, उतनी कभी नहीं रही। आप एक बेहतर इंसान बनकर बेहतर समाज का निर्माण करें। प्रकृति, पर्यावरण की रक्षा करें और इसकी निरंतरता बनाएं रखें।
मन में करुणा का भाव हमेशा रखें
प्रो चांसलर दौलत सिंह चौहान ने कहा कि अगर हमें तकनीक युग के लिए स्टीव जॉब्स और मार्क जकरबर्ग जैसे युवा चाहिए तो बेहतर राष्ट्र निर्माण के लिए विवेकानंद और महात्मा गांधी जैसे भी होने चाहिए। आप कितने भी सफल हो जाएं, लेकिन मन में करुणा का भाव हमेशा रखें।
ग्लोबल टीचर अवार्ड विजेता रंजीत सिंह दिसाले ने कहा कि शिक्षक अपने विद्यार्थियों के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर देते हैं। मैं इंजीनियर की जगह शिक्षक बना, क्योंकि शिक्षक देश का भविष्य बनाता है। हमें बेहतर शिक्षकों की आवश्यकता है। युवा बढ़े और इसमें अपना भविष्य बनाएं।
शिक्षा को साधना बनाएं
शास्त्रीय संगीत गायिका अश्विनी भिड़े देशपांडे ने कहा कि शिक्षा में तो डिग्री मिल जाती है, लेकिन संगीत तान सही छेडऩे में सफल हो जाना, वो मेरी डिग्री है। अगर मैंने अभ्यास करना छोड़ दिया तो वो मुझे छोडकऱ चली जाएगी। शिक्षा को साधना बनाएं तो वह आपसे कभी दूर नहीं जा सकती।
जो संकट से भागते नहीं, वे महान होते हैं
मप्र विवि विनियामक आयोग के अध्यक्ष भरत शरण सिंह ने कहा कि जो संकट से भागते नहीं वो महान होते हैं। समस्याओं से धैर्यता के साथ जूझने वाला ही सफल होता है। युवाओं में दृढ़निश्चितता होना चाहिए। विवेकानंद और अब्दुल कलाम आजाद हर युवा के आदर्श होने चाहिए।
इन्हें मिली मानद उपाधि
समारोह में पद्मभूषण कुमुदिनी लखिया, पद्मभूषण अर्पिता सिंह, अभिनेत्री पद्मभूषण शर्मिला टैगोर, संगीत गायिका अश्विनी भिड़े देशपांडे, पद्मश्री मिथाली राज, पद्माविभूषण अनिल ककोडकऱ व ग्लोबल टीचर अवार्ड के विजेता शिक्षक रंजीतसिंह दिसाले को मानद उपाधि नाम रही। इनमें से पद्ूमभूषण कुमुदिनी लखिया, पद्मभूषण अर्पिता सिंह, पद्म भूषण शर्मिला टैगोर, पद्मश्री मिथाली राज, पद्माविभूषण अनिल ककोडकऱ व्यक्तिगत कारणों से कार्यक्रम में उपस्थित नहीं रह पाए।
28 स्टूडेंट्स को मिले गोल्ड मेडल, 980 को डिग्री
विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर व उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 28 स्टूडेंट्स को गोल्ड मेडल, तीन को पीएचडी की उपाधि दी गई। इसके अलावा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 8 स्पांसर्ड मेडल दिए गए। 980 स्टूडेंट्स को गोल्ड मेडल, स्नातक व स्नातकोत्तर की उपाधियां प्रदान की गईं।
Published on:
21 Nov 2021 10:41 am
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