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घडिय़ालों के लिए मौत का कारण बन रहा मगरमच्छों का बढ़ रहा कुनवा

घडिय़ालों के लिए संरक्षित चंबल अभयारण्य में मगरमच्छ का कुनवा लगातार बढ़ रहा है, जो घडिय़ालों की ग्रोथ पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है.....
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Gaurav Sen

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Updated: 21 Dec 2016, 5:56 PM IST

crocodile vs ghariyal

crocodile vs ghariyal


जयसिंह गुर्जर @ श्योपुर

घडिय़ालों के लिए संरक्षित चंबल अभयारण्य में मगरमच्छ का कुनवा लगातार बढ़ रहा है, जो घडिय़ालों की ग्रोथ पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। यही वजह है कि चंबल में लगातार बढ़ रही मगरमच्छ की आबादी को लेकर अभयारण्य प्रबंधन और विशेषज्ञ चिंतित हैं। हालांकि विशेषज्ञ इस पर मंथन में जुटे हुए हैं, लेकिन बीते पांच सालों में चंबल में मगरमच्छ की आबादी 57 फीसदी बढ़ गई है, जो किसी भी सूरत में घडिय़ालों के अनुकूल नहीं हैं।

वर्ष 1978 में श्योपुर जिले के पाली से 435 किलोमीटर लंबे चंबल के क्षेत्र को चंबल अभयारण्य घोषित किया, साथ ही घडिय़ालों के लिए रिजर्व किया गया। हालांकि नदी में अन्य जलीय जीव भी ग्रोथ कर सकते हैं, लेकिन घडिय़ालों के लिए रिजर्व अभयारण्य क्षेत्र में मगरमच्छों की संख्या बढऩा खतरे की घंटी है। बताया गया है कि मगरमच्छ जहां घडिय़ालों के नेस्ट और हैचरिंग पाइंटों पर कब्जा कर रहे हैं, बल्कि घडिय़ालों के अंडों को भी नष्ट कर देते हैं या खा जाते हैं। जिसके चलते घडिय़ालों की ग्रोथ पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

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शायद यही वजह है कि बीते पांच सालों में जहां मगरमच्छ की आबादी तो 57 फीसदी बढ़ी है, जबकि घडिय़ालों की आबादी मेें महज 28 फीसदी ही इजाफा हो पाया है। बताया गया है कि वर्ष 2012 में चंबल में 295 में घडिय़ाल थे, जो वर्ष2016 में बढ़कर 464 हो गए हैं। चूंकि मगरमच्छ भी शेड्यूल-1 का जलीय जीव है, ऐसे में उसकी ग्रोथ पर भी अंकुश नहीं लगा सकते है, लिहाजा विशेषज्ञ इसी चिंता में डूबे हैं कि चंबल में बढ़ रही मगरमच्छ की आबादी से घडिय़ालों को किस प्रकार संरंक्षित रखा जाए।

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यह बात सही है कि चंबल में मगरमच्छों की संख्या नैसर्गिक रूप से ज्यादा बढ़ रही है, जो घडिय़ालों के खतरा है। क्योंकि मगरमच्छ घडिय़ालों के अंडों को नष्ट कर देेते हैं और उनके हैचरिंग पाइंट भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। निश्चित रूप से ये चिंतनीय विषय है और इसके लिए विशेषज्ञ मंथन भी कर रहे हैं।
ज्योति डंडोतिया, केयर टेकर, देवरी घडिय़ाल केंद्र मुरैना