शायद यही वजह है कि बीते पांच सालों में जहां मगरमच्छ की आबादी तो 57 फीसदी बढ़ी है, जबकि घडिय़ालों की आबादी मेें महज 28 फीसदी ही इजाफा हो पाया है। बताया गया है कि वर्ष 2012 में चंबल में 295 में घडिय़ाल थे, जो वर्ष2016 में बढ़कर 464 हो गए हैं। चूंकि मगरमच्छ भी शेड्यूल-1 का जलीय जीव है, ऐसे में उसकी ग्रोथ पर भी अंकुश नहीं लगा सकते है, लिहाजा विशेषज्ञ इसी चिंता में डूबे हैं कि चंबल में बढ़ रही मगरमच्छ की आबादी से घडिय़ालों को किस प्रकार संरंक्षित रखा जाए।