
पखावज वादन शैली से प्रभावित है पंजाब घराने की वादन शैली
ग्वालियर. तबले में पंजाब घराने की वादन शैली पखावज वादन शैली से प्रभावित है। इस घराने के कायदे अन्य घरानों की अपेक्षा क्लिष्ट हैं। पखावज पर आधारित खुला बाज होने के कारण इस घराने की वादन शैली में तबले पर चारों उंगलियों एवं थाप का प्रयोग किया जाता है। अविस्तारशील रचनाओं के अंतर्गत चक्रदार रचनाओं के बीच विराम की क्लिष्टता इस घराने की विशेषता है। यह बात इंदौर के हितेंद्र दीक्षित ने ऑनलाइन शृंखला 'ताल संवाद' में कही। यह संवाद कार्यक्रम संगीत विश्वविद्यालय के अवनद्ध वाद्य (तबला) विभाग की ओर से आयोजित किया जा रहा है।
गुरु ने सुनाए रोचक संस्मरण
गुरु हितेन्द्र दीक्षित ने तबला वादन के पंजाब घराने के संबंध में चर्चा की। उन्होंने बताया कि पंजाब घराने मे विलंबित लय के चक्करदार बजाए जाते हैं तथा रेले से पहले रेले की जमीन बरतना इसकी खास विशेषताओं में है। उन्होंने बताया कि पंजाब घराने को वर्तमान समय में प्रचारित करने में उस्ताद अल्ला रक्खा साहब का अमूल्य योगदान है। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन मनीष करवड़े ने किया।
Published on:
18 May 2020 07:03 pm
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