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ग्वालियर… डीजल कटौती: जिला अस्पताल में टला ऑपरेशन, अपार्टमेंट, होटलों में परेशानी

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने प्लास्टिक की कैन में डीजल ले जाने पर लगाए गए प्रतिबंध को आखिरकार शिथिल कर दिया है। कृषि सीजन की शुरुआत और किसानों ...

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electricity cut in hospital

electricity cut in hospital

ग्वालियर. खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने प्लास्टिक की कैन में डीजल ले जाने पर लगाए गए प्रतिबंध को आखिरकार शिथिल कर दिया है। कृषि सीजन की शुरुआत और किसानों की चौतरफा बढ़ती मांग को देखते हुए शासन को यह यू-टर्न लेना पड़ा। नए आदेश के तहत अब किसान और छोटे कारोबारी प्लास्टिक कैन में डीजल ले जा सकेंगे, लेकिन एक बार में अधिकतम 200 लीटर की ही सीमा तय की गई है। शासन का यह फॉर्मूला अब शहर के सरकारी और निजी संस्थानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। शुक्रवार को इसकी बानगी जिला अस्पताल में देखने को मिली, जहां इस नियम के चक्कर में एक गंभीर ऑपरेशन तक टालना पड़ गया। मरीजों को भी समस्या हुई। इस समस्या से शहर के कुछ बड़े होटल और अपार्टमेंट, डिपार्टमेंटल स्टोरी भी परेशान हो रहे हैं।

शुक्रवार को घोषित चार घंटे की बिजली कटौती को देखते हुए जिला अस्पताल प्रबंधन एडवांस में डीजल लेने पंप पर पहुंचे। नियम का हवाला देकर उन्हें सिर्फ 200 लीटर डीजल दिया गया। अस्पताल के भारी-भरकम जनरेटर में यह डीजल महज ढाई घंटे में ही फूंक गया। जब जनरेटर बंद हुआ, तो अस्पताल स्टाफ दोबारा डीजल लेने पंप पर दौड़ा। लेकिन पंप संचालक ने दोबारा डीजल देने से साफ मना कर दिया, क्योंकि जिला अस्पताल को डीजल उधार खरीदना पड़ता है और नए नियमों में इसकी कड़ाई है। आखिरकार, जच्चा खाने के बैकअप स्टॉक से डीजल निकालकर जनरेटर चलाया गया, लेकिन तब तक देरी होने के कारण एक मरीज का ऑपरेशन टालना पड़ गया।

क्यों कड़े करने पड़े थे नियम?

  • पिछले कुछ समय से जिले में सामान्य डीजल की बिक्री में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जबकि इसके मुकाबले कॉमर्शियल (व्यावसायिक) डीजल की खपत में भारी गिरावट आई थी। इस बड़े अंतर और राजस्व के नुकसान को देखते हुए शासन ने नियम कड़े कर दिए थे।
  • जिले में पहले एक बार में अधिकतम 300 लीटर डीजल देने का प्रावधान किया गया था, जिसे अब घटाकर 200 लीटर निर्धारित कर दिया गया है।

यहां भी डीजल कटौती की मार

एक बार 200 लीटर डीजल देने का नियम अस्पताल सहित दूसरी जगहों पर भी परेशानी का सबब बन सकता है। शहर के बैंकों, अपार्टमेंट (सोसायटी), होटल, हॉस्टल, सडक़ निर्माण, कमर्शियल बिङ्क्षल्डग, स्कूल-कॉलेज, सरकारी कार्यालयों, छोटे कुटीर उद्योगों के जनरेटर, कृषि कार्य में प्रयुक्त पंप सेट और ट्रैक्टर मालिकों, माइङ्क्षनग क्षेत्रों के ग्राहक, जो छोटे मशीन आउटसोर्सिंग कंपनियों को देकर ड्रम से ही पेट्रोल पंपों से डीजल लेकर काम चलाते हैं, उन्हें भी परेशानी होगी।

नियम से काफी समस्या आ रही है

भारत सरकार के इस नियम के पालन के लिए जिले भर के पेट्रोलियम डीलर्स पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं और पालन भी कर रहे हैं। हालांकि जो हमेशा से ही अपने निकट के पंप से डीजल लेते आए हैं और उनकी रोजाना की खपत 200 लीटर से अधिक है, इन्हें खासी समस्या आ रही है।
अमित सेठी, सचिव, ग्वालियर डिस्ट्रिक्ट पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन

प्लास्टिक की कैन व ड्रम में डीजल ले सकते हैं

प्लास्टिक की कैन व ड्रम में डीजल ले सकते हैं, लेकिन 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं दिया जाएगा। जिन पेट्रोल पंपों ने 200 लीटर से ज्यादा डीजल बेचा है, उनकी जांच की जानी है। इसके लिए दल बनाया है।
अरङ्क्षवद भदौरिया, जिला आपूर्ति नियंत्रक