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बिजली कंपनी ने आंकलित आधार पर थमाया 1.72 लाख का बिल, फोरम ने किए निरस्त

चार हजार रुपए मानसिक क्षति के रूप में भी देने होंगे

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बिजली कंपनी ने आंकलित आधार पर थमाया 1.72 लाख का बिल, फोरम ने किए निरस्त

बिजली कंपनी ने आंकलित आधार पर थमाया 1.72 लाख का बिल, फोरम ने किए निरस्त

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने बिजली कंपनी द्वारा जारी 1.72 लाख रुपए के जारी आकंलित खपत के बिल निरस्त कर दिए। उपभोक्ता को गलत बिल देकर जो मानसिक पीड़ा पहुंचा है, उसके बदले में 4 हजार रुपए क्षतिपूर्ति अदा करें। मीटर खपत के आधार पर वास्तविक बिल जारी किया जाए।

दरअसल अशोक कुमार चौरसिया ने वर्ष 2017 में बिजली का कनेक्शन लिया था। कनेक्शन लेने के बाद बिजली कंपनी ने रीडिंग नहीं की। फरवरी 2019 में 1 लाख 7 हजार 835 रुपए का आंकलित खपत का बिल भेज दिया। इसके बाद जून 2020 में 1 लाख 44 हजार रुपए का आंकलित खपत बिल दे दिया। फरवरी 2021 में 1 लाख 72 हजार का बिल जारी किया गया। बिजली कंपनी के कंपू जोन में शिकायत की तो सुनवाई नहीं की और बिल जमा कराने का दबाव बनाया गया। कनेक्शन काटने की चेतावनी दी गई। इसको लेकर फोरम में परिवाद दायर किया। परिवादी ने तर्क दिया कि मीटर में 4 हजार 487 यूनिट की खपत निकली, लेकिन बिल ज्यादा दिया गया। बिजली कंपनी ने गलत बिल देकर सेवा में कमी की है। बिजली कंपनी ने तर्क दिया कि सॉफ्टवेयर की वजह से गलत कॉलम में खपत दर्ज हो गई। वास्तविक आधार पर बिल जारी किया गया है। इसलिए परिवाद को खारिज किया जाए। फोरम ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सभी निरस्त कर दिए। वास्तविक आधार पर बिल देने का आदेश दिया है।

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