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विद्युत कंपनी की बढ़ी चिंता, विद्युत प्रहरी प्रोजेक्ट हुआ फेल

मध्यप्रदेश पॉवर मैैनेजमेंट कंपनी की तीनों बिजली कंपनियों के लिए पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया था। इसमें प्रदेश के उन छह जिलों को शामिल किया गया था जहां बिजली के वैध कनेक्शन कम थे और बिजली का अवैध उपयोग ज्यादा था। इन जिलों में बिजली की हानि 60 फीसदी से अधिक थी।
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ग्वालियर

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Rajesh Shrivastava

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Updated: 27 Jan 2022, 8:05 PM IST

विद्युत कंपनी की बढ़ी चिंता, विद्युत प्रहरी प्रोजेक्ट हुआ फेल

विद्युत कंपनी की बढ़ी चिंता, विद्युत प्रहरी प्रोजेक्ट हुआ फेल

नितिन त्रिपाठी

ग्वालियर . प्रदेश के छह जिलों में बिजली चोरी और नुकसान से परेशान बिजली कंपनी ने यहां विद्युत प्रहरी बैठा दिए हैं, लेकिन इन विद्युत प्रहरियों की कामयाबी का अभी एक भी किस्सा सामने नहीं आया है। ऐसे में बिजली कंपनी का यह पायलट प्रोजेक्ट संकट में नजर आ रहा है।

मध्यप्रदेश पॉवर मैैनेजमेंट कंपनी की तीनों बिजली कंपनियों के लिए पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया था। इसमें प्रदेश के उन छह जिलों को शामिल किया गया था जहां बिजली के वैध कनेक्शन कम थे और बिजली का अवैध उपयोग ’यादा था। इन जिलों में बिजली की हानि 60 फीसदी से अधिक थी। इसको लेकर भी बिजली कंपनी की चिंता बढ़ गई थी। बहरहाल ऊर्जा मंत्री के पास विद्युत प्रहरी प्रोजेक्ट की सफलता का कोई परिणाम नहीं है। सदन में उन्होंने कहा कि प्रारंभिक स्थिति में इस प्रोजेक्ट के फायदे बताना संभव नहीं है।

भिंड : एक फीडर पर शुरुआत, काम औसत
जिले में अभी पायलट प्रोजेक्ट के बाद भी सिर्फ एक फीडर पर ही विद्युत प्रहरी की शुरूआत की गई है। इसके सफल नतीजों पर अभी बिजली अधिकारी ही संतुष्ट नही हैं। वे कहते हैं फिलहाल औसत परिणाम हैं, आगे देखते हैं, इसका कितना फायदा होता है।

छतरपुर : दो फीडर पर प्रहरी बैठाए गए
प्रोजेक्ट अगस्त 2021 में लाया गया लेकिन छतरपुर में विद्युत प्रहरी का काम दिसंबर से शुरू होना बताया जाता है। अभी यहां केवल दो फीडर पर ही विद्युत प्रहरी बैठाए गए हैं।

मुरैना : अभी नहीं थमी बिजली चोरी
जिले में बिजली नुकसान को लेकर कंपनी के एमडी ने यहां उपमहाप्रबंधक सहित तीन को निलंबित कर दिया था। एमडी ने खुद कटिया डालकर बिजली चोरी होते हुए देखी थी। इस जिले में विद्युत प्रहरी प्रोजेक्ट फेल नजर आ रहा है।

विद्युत फीडर व ट्रांसफार्मर के आधार पर किया चयन
बिजली कंपनी ने इन जिलों में उन विद्युत फीडर या ट्रांसफॉर्मर के आधार पर विद्युत प्रहरी बैठाए थे, जिनमें बिजली चोरी ज्यादा थी। पायलट प्रोजेक्ट एक साल के लिए है, इसके लिए आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से विद्युत प्रहरी तैनात किए गए।

भिंड, मुरैना सहित ये 6 जिले शामिल
इस पायलट प्रोजेक्ट के पीछे उद्देश्य बिजली का नुकसान रोकना, बिजली के अवैध इस्तेमाल पर नियंत्रण रखना और राजस्व संग्रहण यानी बिजली बिल का बकाया वसूली करना था। इसमें भिंड, मुरैना, छतरपुर, टीकमगढ़, आगर और शाजापुर जिलों को लिया गया था। बिजली कंपनी की मानें तो इन जिलों में बिजली के वैध कनेक्शन कम थे।

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