22 मार्च 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

रसोई में गैस नहीं तो क्या, इरादों में दम है : चुनौतियों के बीच भी जारी है ‘अन्नदान’ का महायज्ञ

ग्वालियर. कहते हैं कि जब सेवा का संकल्प हिमालय जैसा ऊंचा हो, तो संसाधनों की कमी कभी बाधा नहीं बनती। वर्तमान में जब ईरान-इजरायल युद्ध के हालातों और वैश्विक संकट के कारण कमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत ने बड़े-बड़े होटलों के चूल्हे ठंडे कर दिए हैं, ग्वालियर की गलियों में अन्नदान की खुशबू वैसी ही महक […]

2 min read
Google source verification

रोजाना 500 लोगों की बुझ रही भूख, संकट में बदला रास्ता,

ग्वालियर. कहते हैं कि जब सेवा का संकल्प हिमालय जैसा ऊंचा हो, तो संसाधनों की कमी कभी बाधा नहीं बनती। वर्तमान में जब ईरान-इजरायल युद्ध के हालातों और वैश्विक संकट के कारण कमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत ने बड़े-बड़े होटलों के चूल्हे ठंडे कर दिए हैं, ग्वालियर की गलियों में अन्नदान की खुशबू वैसी ही महक रही है। प्रतिदिन नि:शुल्क भोजन वितरण करने वाली संस्थाओं ने इसके लिए दूसरे विकल्प भी ढूंढ लिए हैं। जहां परंपरा और तकनीक के संगम ने सेवा की रफ्तार को थमने नहीं दिया है। ग्वालियर की ये संस्थाएं यह साबित कर रही हैं कि परोपकार केवल अतिरिक्त धन से नहीं, बल्कि अटूट संकल्प से होता है। ईंधन बदल गया, साधन बदल गए, लेकिन भूखे को भोजन कराने की जिद नहीं बदली।

लकड़ी की तपिश से बुझ रही 500 पेट की आग

जेएएच अस्पताल के आश्रय भवन में पिछले 11 वर्षों से ग्वालियर सेवा भाव समिति एक मिसाल पेश कर रही है। जहां आज के दौर में लोग बिना गैस के चाय बनाने की नहीं सोचते, वहां यह संस्था रोजाना 500 से अधिक लोगों के लिए लकड़ी के चूल्हे पर शुद्ध सात्विक भोजन तैयार कर रही है। संस्था अध्यक्ष रमेशचंद गोयल लल्ला के अनुसार, गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होता, घर जैसा स्वाद ही हमारी पहचान है। बिना किसी सरकारी अनुदान के, 50 सदस्यों के सहयोग से चल रहा यह महायज्ञ कोरोना काल में भी नहीं रुका था, जब ढाई लाख लोगों तक भोजन पहुंचाया गया था।

तकनीक बनी सहारा : सिलेंडरों के इंतजार से मुक्ति

दूसरी ओर, समर्पण अन्नम दानम चेरिटेबल सोसायटी ने संकट को अवसर में बदला है। अध्यक्ष जीडी लड्ढा ने बताया कि कैंसर अस्पताल और मुरार अस्पताल में रोजाना करीब 1400 लोगों तक भोजन पहुंचाने के लिए अब वे कमर्शियल सिलेंडरों के बजाय पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) का उपयोग कर रहे हैं। वे बताते हैं कि सिलेंडरों के लिए पहले लंबा इंतजार करना पड़ता था और खर्च भी अधिक था। अब पीएनजी के जरिए सेवा निर्बाध जारी है, जिसका मासिक बिल ही करीब एक लाख रुपए आता है।

युद्ध की मार पर भारी थाटीपुर व्यापार मंडल की जिजीविषा

वैश्विक तनाव (अमेरिका-ईरान और इजरायल युद्ध) के कारण जब कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति ठप हुई, तो जिला अस्पताल मुरार में मरीजों के परिजनों को खिलाने वाली व्यापार संघ थाटीपुर की टीम के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया। रोजाना एक सिलेंडर की खपत थी। लेकिन सेवा का पहिया रुकने नहीं दिया गया। संस्था अध्यक्ष राजेंद्र खंडेलवाल ने बताया कि तुरंत पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन किया और पिछले आठ दिनों से नई ऊर्जा के साथ 250 लोगों की थाली सजाई जा रही है।