ग्वालियर

राफेल उड़ाने वाले आरकेएस भदौरिया भाजपा में शामिल, मध्यप्रदेश से है खास नाता

RKS Bhadauria join bjp-बीहड़ ग्वालियर के वायु नगर में है भदौरिया के माता-पिता का मकान...। यही पर रहकर राकेश ने की थी पढ़ाई...।

2 min read
Mar 24, 2024
देश के बेहतरीन पायलटों में शामिल थे आरकेएस भदौरिया। अब राजनीति में उतरे।

भारत के चीफ ऑफ एयर स्टाफ रह चुके राकेश कुमार सिंह भदौरिया भी भारतीय जनता पार्टी के सदस्य बन गए हैं। भारतीय वायु सेना के पूर्व अध्यक्ष भदौरिया ने रविवार को दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ले ली। माना जा रहा है कि भदौरिया को पार्टी टिकट भी देने जा रही है। खास बात यह है कि भदौरिया का मध्यप्रदेश से खास रिश्ता है। राकेश कुमार सिंह का पैतृक गांव आगरा जिले के कोरथ के बाह से करीब पंद्रह किमी दूर बीहड़ में है। लेकिन, उनका परिवार मध्यप्रदेश के ग्वालियर में ही बस गया था। यहीं पर राकेश सिंह भदौरिया पले-बढ़े। ग्वालियर के वायु नगर में उनके माता-पिता का घर है।

वायुसेना के प्रमुख रहे राकेश कुमार सिंह भदौरिया अब भाजपा नेता हो गए हैं। और भदौरिया का पैतृक घर आगरा की बाह तहसील में है ग्वालियर के वायु नगर में उनके माता-पिता रहते हैं। उनके पिता पूर्व वायुसेना अधिकारी एसपी सिंह भदौरिया और माता विद्या देवी भी ग्वालियर-भिंड रोड स्थित वायु नगर कालोनी में रहते हैं। ग्वालियर में रहने वाले एसपी सिंह भदौरिया सीनियर नान कमीशंड अधिकारी रह चुके हैं। उनके दो बेटे और दो बेटियां है। बड़े बेटे राकेश कुमार सिंह और छोटे बेटे राजीव कुमार सिंह हैं। बड़े बेटे राकेश जुनूनी हैं और इसी कारण वे वायुसेना में इस पद तक पहुंच गए। 12 पास करने के बाद राकेश एनडीए में सिलेक्ट हो गए थे और साल 1980 में उन्होंने भारतीय वायुसेना को फ्लाइट लेफ्टिनेंट के रूप में ज्वाइन कर लिया था। देश के बेहतरीन पायलट होने के कारण उन्हें राफेल और जगुआर लड़ाकू विमान उड़ाने का भी मौका मिला था।

मध्यप्रदेश, राजस्थान और यूपी की सीमाएं भदावर क्षेत्र से मिलती है। दुर्गम बीहड़ों से भरा यह क्षेत्र चंबल, यमुना और उटंगन नदियों से घिरा हुआ है। यह क्षेत्र देश पर जान न्योछावर करने वाले वीरों के लिए जाना जाता है। चंबल के आसपास के क्षेत्र के रुदमुली, कोरथ, सिमराई, चैतपुर, धमना से लेकर उदी मोड़ तक भदौरिया राजपूत बहुल गांवों में हर घर से कोई न कोई जवान सेना या पुलिस विभाग की सेवा कर रहा है। इसी भादवर क्षेत्र के होने के कारण राजपूत अपने नाम के साथ भदौरिया लिखते हैं।

Updated on:
24 Mar 2024 03:49 pm
Published on:
24 Mar 2024 03:42 pm
Also Read
View All

अगली खबर