
डाक विभाग के गंगाजल की मांग अब हर महीने रहने लगी है।
ग्वालियर. कभी सावन का महीना आते ही या महाशिवरात्रि से कुछ दिन पहले ही डाकघरों के बाहर गंगाजल की बोतल के लिए लाइन लगती थी। अब तस्वीर बदल गई है। ग्वालियर के डाकघरों में गंगाजल बारहमासी आस्था का प्रतीक बन गया है। पूजा-पाठ हो, गृह प्रवेश हो या किसी अपने को दिया जाने वाला पवित्र उपहार, लोग सीधे डाकघर का रुख कर रहे हैं। डाक विभाग के ताजा आंकड़े इस बदलती आस्था की कहानी खुद बयां कर रहे हैं। साल 2026 के सिर्फ 8 महीनों में ही ग्वालियर डिवीजन ने 4506 बोतल गंगाजल बेच डाला है, जिससे विभाग को 1 लाख 35 हजार 180 रुपए का राजस्व मिला है। यानी औसतन हर दिन करीब 18 परिवारों तक गंगोत्री का शुद्ध जल पहुंच रहा है। साफ है, ग्वालियर में गंगाजल अब कैलेंडर नहीं देखता, वह रोजमर्रा की आस्था बन चुका है।
फरवरी में फूटा आस्था का पहला सैलाब, जून में सर्वाधिक
आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे दिलचस्प कहानी महीनों के उतार-चढ़ाव में छिपी है। साल की शुरुआत जनवरी में 539 बोतलों के साथ हुई। लोगों ने नए साल पर घर में गंगाजल से शुद्धिकरण किया। लेकिन फरवरी 2026 में बिक्री ने पहली छलांग मारी। इस महीने 829 बोतलें बिकीं, कीमत 24,870 रुपए। वजह साफ थी - 26 फरवरी को महाशिवरात्रि। शिवभक्तों ने अभिषेक के लिए डाकघर वाले गंगाजल को सबसे ज्यादा भरोसेमंद माना। मार्च से मई तक आंकड़ा स्थिर रहा - मार्च में 223, अप्रैल में 254 और मई में 280 बोतलें। गर्मी के कारण आवक कम, मांग भी सामान्य।
और फिर आया जून। जून 2026 ने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। अकेले इस महीने 1687 बोतलें बिकीं, जिनकी कीमत 50,610 रुपए है। यह पूरे 8 महीने की कुल बिक्री का लगभग 37 फीसदी है। डाक विभाग प्रवर अधीक्षक एके सिंह ने बताया, जून में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे बड़े पर्व थे। इसके अलावा चारधाम यात्रा का सीजन शुरू होते ही लोगों ने यात्रा से पहले घर में गंगाजल रखने की परंपरा निभाई। लोगों को अब नकली के डर से सीधे सरकारी सील पर ज्यादा भरोसा है। यही वजह है कि पूरे वर्ष गंगाजल की बिक्री होती है। जुलाई, यानी सावन के महीने में 342 बोतलें और अगस्त में अब तक 352 बोतलें बिक चुकी हैं। यानी सावन खत्म होने वाला है, फिर भी मांग में कोई कमी नहीं।
इसलिए हिट है मॉडल
डाक विभाग गंगोत्री, उत्तराखंड से सीधे गंगाजल मंगवाता है और 30 रुपए प्रति बोतल की सस्ती दर पर बेचता है। निजी बाजार में इसी शुद्धता के नाम पर 60 से 80 रुपए तक वसूले जाते हैं, और मिलावट का डर अलग। पहले लोग समझते थे कि गंगाजल सिर्फ बुजुर्गों की जरूरत है, लेकिन अब युवा भी इसे अपने पूजा घर का हिस्सा बना रहे हैं।
Updated on:
24 Aug 2026 11:17 am
Published on:
24 Aug 2026 11:16 am
