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यहां सार्वजनिक टॉयलेट की छत पर बैठकर पढ़ती हैं लड़कियां, हैरान कर देगी आपको ये खबर

शहर के किला रोड स्थित कन्या प्राथमिक विद्यालय की छात्राएं एक सार्वजनिक टॉयलेट की छत पर बैठकर पढ़ाई करती हैं। 

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monu sahu

Jul 16, 2017

girl study sit on roop

girl study sit on roop of public toilet

ग्वालियर/श्योपुर। बालिका शिक्षा के नाम पर भले ही तमाम योजनाएं चलाई जा रही हों,लेकिन स्थितियों में सुधार नहीं आ रहा है। सोशल मीडिया पर शनिवार को नगर पालिका के बाहर सरकारी स्कूल के कुछ बच्चों का पढ़ते हुए एक फोटो वायरल हुआ है। इस फोटो में स्कूल के बच्चे सार्वजनिक टॉयलेट की छत पर बैठकर पढ़ रहे थे और नीचे दो युवक टॉयलेट कर रहे थे। वायरल फोटो ने शिक्षा विभाग से लेकर पूरे प्रशासन में बवाल मचा दिया। जिला शिक्षा अधिकारी ने तत्काल ही एक टीम जांच के लिए गठित कर दिया।

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वहीं स्कूल के हेडमास्टर बच्चों के टॉयलेट की छत पर बैठने की खबर से खुद को पूरी तरह अनभिज्ञ बता रहे हैं। जो फोटो वायरल हुआ है उसमें श्योपुर शहर के किला रोड स्थित कन्या प्राथमिक विद्यालय की छात्राएं एक सार्वजनिक टॉयलेट की छत पर बैठकर पढ़ाई करती हैं। जबकि विद्यालय के लिए भवन भी है,लेकिन उसमें दो ही कमरे स्कूल के पास हैं,जिसके चलते स्कूल प्रबंधन छात्राओं को इधर-उधर बैठा देता है। पर स्कूल प्रबंधन को यह भी नहीं देख रहा कि छात्राएं कहां बैठ रही हैं।



शहर के किला रोड स्थित शासकीय कन्या प्राथमिक विद्यालय संचालित है। इसके लिए बने भवन में तीन कमरे हैं,जिसके दो कमरों में कन्या प्राथमिक स्कूल सुबह की शिफ्ट में चलता है, जबकि दूसरी शिफ्ट में माध्यमिक उर्दु गांधी विद्यालय चलता है,जिसे एक कमरा दिया हुआ है। भवन के पास ही किला रोड की ओर एक सार्वजनिक टॉयलेट बना हुआ है और बीच में एक छोटी सी गैलरी है।

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बताया गया है कि पर्याप्त जगह के अभाव में विद्यालय के शिक्षक छात्राओं को इन कमरों से निकालकर गैलरी में बिठा देते हैं और कई छात्राएं तो सड़क किनारे बने सार्वजनिक टॉयलेट की छत पर बैठती हैं। लोगों ने बताया कि अक्सर छात्राएं सार्वजनिक टॉयलेट की छत पर बैठकर पढ़ती नजर आती हैं। बावजूद इसके स्कूल प्रबंधन ने इसे कभी भी गंभीरता से नहीं लिया।



स्कूल में पढ़ती हैं 150 छात्राएं
शासकीय कन्या प्राथमिक विद्यालय में लगभग डेढ़ सैकड़ा छात्राएं पढ़ती हैं। जिनके लिए चार शिक्षक यहां पदस्थ हैं। लेकिन छात्राओं के बैठने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है। यही वजह है कि दो कमरों में ही पांच कक्षाएं लगती हैं। जाहिर ऐसे में छोटी-छोटी बालिकाएं क्या पढ़ पाएंगी और उनकी नींव कैसी होगी।


एक कमरे में चल रहा उर्दु गांधी
इसी परिसर के एक कमरे में शासकीय माध्यमिक उर्द गांधी विद्यालय भी संचालित है। हालांकि प्राथमिक उर्द गांधी तो वार्ड 15 के एक भवन में शिफ्ट हो गया है, लेकिन वर्ष 2002 से लेकर अभी तक मिडिल उर्दु गांधी को भवन नहीं मिल सका है। जिसके चलते इस विद्यालय की तीनों कक्षाओं के लिए एक कमरा दिया हुआ है। यहां 54 छात्र-छात्राएं हैं, जिन पर 3 शिक्षक हैं।


"ऐसा नहीं है, हम बच्चियों को कमरों में ही बिठाते हैं। वो तो लाइट चली जाती है या रेस्ट के समय छात्राएं गैलरी में बैठ जाती हैं। हो सकता है उसी समय कुछ बच्चियां टॉयलेट की छत पर बैठ गई हों।"
अशोक शिवहरे,हैडमास्टर,कन्या प्रायमरी किला रोड


"सोशल साइट पर एक फोटो वायरल हुआ था जिसे मैंने देखने के तत्काल बाद जांच के लिए एक टीम बनाकर वहां भेजा है। जिसकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।"
अजय कटियार, जिला शिक्षा अधिकारी, श्योपुर