19 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

प्रीऑपरेटिव एम्बोलाइजेशन तकनीक से जटिल स्कल मेनिंजियोमा का सफल ऑपरेशन

विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक जटिल न्यूरोसर्जरी में सफलता की संभावना को काफी बढ़ाती है।

2 min read
Google source verification
इस प्रकार के ट्यूमर में अत्यधिक रक्त आपूर्ति होने के कारण सर्जरी के दौरान गंभीर रक्तस्राव का खतरा बना रहता है, जो मरीज के जीवन के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है। ऑपरेशन से पहले डॉक्टरों ने प्रीऑपरेटिव ट्यूमर एम्बोलाइजेशन तकनीक का उपयोग किया।

source patrika photo

आरएनटी मेडिकल कॉलेज का मामला : मरीज को मिला नया जीवन, आधुनिक तकनीक से ऑपरेशन हुआ सुरक्षित, रक्तस्राव में आई कमी



उदयपुर. आरएनटी मेडिकल कॉलेज एवं सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में इंटरवेंशनल न्यूरोसर्जरी टीम ने शनिवार को आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर सफल ऑपरेशन से मरीज को नया जीवन दिया। अस्पताल के विशेषज्ञों की टीम ने 48 वर्षीय मरीज, निवासी वल्लभनगर, के अत्यधिक रक्तवाहिकाओं से युक्त विशाल डिप्लोइक मेनिंजियोमा का सफल और जटिल उपचार कर एक महत्वपूर्ण चिकित्सकीय उपलब्धि हासिल की है। इस प्रकार के ट्यूमर में अत्यधिक रक्त आपूर्ति होने के कारण सर्जरी के दौरान गंभीर रक्तस्राव का खतरा बना रहता है, जो मरीज के जीवन के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है। ऑपरेशन से पहले डॉक्टरों ने प्रीऑपरेटिव ट्यूमर एम्बोलाइजेशन तकनीक का उपयोग किया। इसमें विशेष लिक्विड और सॉलिड एम्बोलिक एजेंट्स के माध्यम से ट्यूमर को रक्त पहुंचाने वाली धमनियों को बंद किया गया। इसके परिणामस्वरूप ऑपरेशन के दौरान रक्तस्राव में उल्लेखनीय कमी आई, ट्यूमर नरम हुआ और उसे सुरक्षित रूप से निकाला जा सका। विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक जटिल न्यूरोसर्जरी में सफलता की संभावना को काफी बढ़ाती है।

बड़े शहराें पर खत्म होगी निर्भरता

आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राहुल जैन ने बताया संस्थान में लगातार आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह उन्नत उपचार सरकारी योजना के अंतर्गत निःशुल्क उपलब्ध है, इससे अब मरीजों को ऐसे जटिल ऑपरेशन के लिए महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने इसे क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।

विशेषज्ञों ने तकनीक को बताया जीवनरक्षक

न्यूरोसर्जरी विभाग के सह-आचार्य डॉ. के.जी. लोधा ने बताया कि ट्यूमर एम्बोलाइजेशन तकनीक अत्यधिक रक्तवाहिकाओं वाले ट्यूमर के इलाज में अत्यंत प्रभावी है। इससे ट्यूमर में रक्त प्रवाह कम होकर नेक्रोसिस होता है, इससे सर्जरी के दौरान उसे निकालना अधिक सुरक्षित हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक गंभीर नकसीर और पोस्टपार्टम हेमरेज जैसे मामलों में भी जीवनरक्षक साबित हो सकती है।

टीमवर्क से मिली सफलता

इस सफल उपचार में सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. विपिन माथुर का विशेष सहयोग एवं मार्गदर्शन भी रहा। न्यूरोसर्जरी, न्यूरोलॉजी और एनेस्थीसिया विभागों की संयुक्त टीम का अहम योगदान रहा। टीम में डॉ. गौरव जायसवाल, डॉ. तरुण रालोत, डॉ. उदिता नैथानी, डॉ. खेमराज मीणा, डॉ. पंकज सोमानी व कैथलैब स्टाफ लोहित दीक्षित, कृष्णा, प्रियंका और रेजिडेंट डॉक्टर शामिल रहे।