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हाथ से पेन भी नहीं पकड़ सकता लक्षित, लेकिन 10वीं में 100% अंक लाकर रचा इतिहास

Cbse 10th Result 2026: सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लक्षित ने आरबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा की दिव्यांग श्रेणी में 100 प्रतिशत अंक हासिल कर मिसाल पेश की है।

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अपने परिवार के साथ लक्षित

RBSE 10th Result: कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों, तो शारीरिक अक्षमता भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। उदयपुर के 18 वर्षीय लक्षित परमार ने इसे सच कर दिखाया है। लक्षित को बचपन से हाथ और पैरों में समस्या है। सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लक्षित ने आरबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा की दिव्यांग श्रेणी में 100 प्रतिशत अंक हासिल कर मिसाल पेश की है। उसके पांचों विषयों में शत- प्रतिशत नंबर आए हैं। गंभीर बीमारी के चलेत लक्षित हाथ से पेन भी नहीं पकड़ सकता है, लेकिन दिमाग इतना तेज कि एक बार देख ले या पढ़ ले तो भूलता नहीं है।

10 साल से पिता गोद में उठाकर ले जा रहे स्कूल

पुरोहितों की मादड़ी के रहने वाले लक्षित के पिता परचून की दुकान चलाते हैं। वे कहते हैं कि सालों बाद इतनी खुशी महसूस हो रही है। रिजल्ट आने के बाद से इतनी बधाइयां मिल रही है कि भूख तक नहीं लगी।

हमने कभी हमारे बेटे को यह महसूस नहीं होने दिया कि उसको कोई शारीरिक कमजोरी है। यह जीत लक्षित और उसके टीचर्स के संघर्षों की है। पिता दिनेश कुमार ने कहा- परिवार के कुछ लोग लक्षित शारीरिक क्षमता पर सवाल करते थे। आज वही मुझे फोन कर बधाई दे रहे हैं।

'एटॉमिक हैबिट्स' पसंदीदा किताब

लक्षित अपनी मर्जी से हिल-डुल भी नहीं सकते, इसलिए उन्होंने अपना ज्यादातर समय लेटे-लेटे ऑनलाइन पढ़ाई और किताबें पढ़ने में बिताया। लक्षित ने बताया कि उसको 'एटॉमिक हैबिट्स' और 'डीप वर्क' जैसे गंभीर नॉवेल पढ़ने का शौक है। स्कूल में नॉर्मल बच्चों के साथ पढ़ने वाले लक्षित की याद्दाश्त इतनी तेज है कि उन्हें एक बार पढ़ा हुआ सब याद हो जाता है।

उनके स्कूल के मैनेजिंग डायरेक्टर कुनाल अरोड़ा का कहना है कि लक्षित के सवाल इतने 'अनूठे' होते हैं कि आम बच्चे वहां तक सोच भी नहीं पाते। 9वीं कक्षा तक सारी परीक्षाओं के पेपर लक्षित ने खुद लिखे थे, लेकिन उसे लिखने में बहुत परेशानी होती थी। 10वीं तक आते आते हमें पता चला कि चिल्ड्रन विद् स्पेशल नीड्स (सीडब्ल्यूएनएस) स्कीम के तहत उसकी जगह एक राइटर परचा लिख सकता है, तो हमने लक्षित को अलग तरह से ट्रेनिंग देना शुरू किया।

पढ़ाई और क्लासेस के साथ- साथ अपने सवालों के जवाब किस तरह बोलकर बताने हैं कि राइटर उसे लिख पाएं। लक्षित को लिखने के लिए 9वीं कक्षा का एक छात्र मिला था। लक्षित बोलकर उत्तर बताते थे और राइटर उसे पेपर पर लिखता था। उसे थर्ड लेंग्वैज यानी संस्कृत की परीक्षा न देने की छूट मिल गई थी। इस स्कीम वाले बच्चों का रिजल्ट माशिबो बाद में जारी करता है।

अब कलक्टर बनकर बदलनी है तस्वीर

अपनी सफलता पर लक्षित कहते हैं, हमें मुश्किलों के बजाय खुद पर फोकस करना चाहिए। लक्षित अब सिविल सर्विसेज की तैयारी कर कलक्टर बनना चाहते हैं। वे समाज के लिए कुछ करने की चाह रखते हैं। लक्षित अपनी बीमारी को बाधा नहीं, बल्कि एक चुनौती मानते हैं।

जब स्कूलों ने फेर लिया था मुंह

दिनेश कुमार ने बताया कि लक्षित की हालत देख कई स्कूलों ने एडमिशन देने से मना कर दिया था। 3-4 स्कूलों के चक्कर काटने के बाद हैप्पी होम स्कूल ने इसकी जिम्मेदारी उठाई। नोट्स लिखने से लेकर हर सुविधा का ध्यान रखा।

क्या है सेरेब्रल पाल्सी?

चिकित्सक कहते हैं कि 'सेरेब्रल' का अर्थ है मस्तिष्क और 'पाल्सी' यानी कमजोरी या मांसपेशियों के उपयोग में समस्या। यह मस्तिष्क के उस हिस्से में चोट लगने या असामान्य विकास के कारण होती है जो मांसपेशियों की गति को नियंत्रित करता है। अधिकतर बच्चों में यह जन्म के समय से ही होती है।

हर बच्चे में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। इसके लक्षणों में मांसपेशियों में बहुत ज्यादा कड़ापन या बहुत ज्यादा ढीलापन। चलने में लड़खड़ाहट या संतुलन बनाने में दिक्कत। हाथों या पैरों का असामान्य तरीके से मुड़ना। बोलने, निगलने या लार टपकने की समस्या।